क्या भीम आर्मी  विपक्षी इंडिया ब्लॉक में जल्द ही शामिल होगी ?

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अखिलेश अखिल 

         अब कोशिश यही कि वेस्टर्न यूपी में काफी लोकप्रिय दलितों की पार्टी भीम आर्मी को इंडिया के साथ जोड़ा जाए। उसकी अपनी ताकत है और कुछ जिलों तक में उसकी अपनी पहचान भी है। उनके लोग भी है और वोटर भी। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय लोक दल भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को अपने साथ लाने और विपक्ष को दलित वोटों का लाभ दिलाने का प्रयास कर रहा है।
                 रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि पार्टी के निश्चित रूप से आजाद के साथ “अच्छे संबंध” हैं। हालांकि, उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया कि भीम आर्मी प्रमुख कब और कैसे विपक्षी गुट में शामिल होंगे, लेकिन कहा कि समय के साथ इंडिया की संख्या “बढ़ी है” और आने वाले दिनों में “निश्चित रूप से और बढ़ेगी”।
              आरएलडी सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती की साख में गिरावट के बीच आजाद विपक्ष को दलित मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।सहारनपुर जिले के घडखौली गांव के रहने वाले आजाद ने दलितों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए दलित आइकन बी आर अंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम का सहारा लिया है। सूत्रों ने कहा कि अगर योजना अंतिम रूप ले लेती है तो आजाद यूपी में एसपी-आरएलडी-कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बन जाएंगे।
             जब आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सब कुछ तय हो गया है कि एनडीए और इंडिया के बीच ही लड़ाई होनी है तब देश के भीतर अब किसी भी राजनीतिक पार्टी को यह भ्रम नहीं है कि अब वह किसके साथ जाए ? अब दो ही ऑप्शन बचे हैं। या तो आप एनडीए के साथ जाइये या फिर इंडिया में मिल जाइये .देश की अधिकतर पार्टियों ने ऐसा।  करीब 32 पार्टियां आज एनडीए के साथ चली गई तो करीब 28 पार्टियां इंडिया के साथ है। करीब दर्जन भर पार्टियां आज भी देश में मौके का इन्तजार कर रही  है कि जिसका पलड़ा भारी ही उसके साथ जाया जाय। ये सब चालक पार्टियां है। हालांकि इनके अपने वजूद हैं लेकिन एक राज्य से बहार कुछ भी नहीं। इसलिए इनकी मज़बूरी यह है कि अपने राज्य में इनकी ताकत बनी रहे और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी बात को रख सकें।      

                      इधर एक बड़ी राजनीति खेल जारी है ,यूपी सबसे ज्यादा चुनावी मैदान बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष को भी लग रहा है कि यूपी में जिसकी जीत हो जाएगी उसकी सरकार दिल्ली में बन जाएगी। अभी बीजेपी की सत्ता है। बीजेपी राज्य में भी सरकार चला राइ है और केंद्र में भी। यूपी में लोकसभा की  80 सीटें है और पिछले दो चुनाव से बीजेपी को अधिकतर सीटें मिलती जा रही है। इस बार के चुनाव में बीजेपी ने मिशन 80 का नारा दिया है। यानी सभी सीटें जितनी है। लेकिन विपक्ष को लग रहा है कि यही मौका है कि बीजेपी को ध्वस्त कर दिया जाए। विपक्ष यही खेल करता भी जा रहा है।          
                      कहा जा रहा है कि आजाद बिजनौर की आरक्षित सीट नगीना से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जहां दलितों और मुसलमानों की संख्या अधिक है। सूत्रों ने बताया कि उनका 9 अक्टूबर को नगीना में एक सार्वजनिक बैठक करने का भी कार्यक्रम है। नगीना का प्रतिनिधित्व वर्तमान में बसपा के गिरीश चंद्र कर रहे हैं, जिन्होंने 2019 में भाजपा के यशवंत सिंह को 1.6 लाख से अधिक वोटों से हराकर सीट जीती थी। तब बसपा को गठबंधन के तहत सपा का समर्थन मिला था।

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