आखिर केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजनाओं का जनजाति समूह में विरोध क्यों ? 

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न्यूज़ डेस्क 
नीति आयोग के निर्देश पर ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित “बड़ी अवसंरचना परियोजना” की कांग्रेस ने गहन समीक्षा की मांग की है और दावा किया कि इससे द्वीप के जनजातीय समुदायों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कांग्रेस ने साफतौर से कहा है कि अगर इन परियोजनाओं को रद्द नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसक बड़ा असर वहां के स्थानीय आदिवासियों पर पडेगा। यह परियोजना आदिवासियों के लिए बेहद खतरनाक है।  

प्रस्तावित परियोजना पर चिंता जताते हुए कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि 72,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को दी गई सभी मंजूरी तत्काल निलंबित की जानी चाहिए और संबंधित संसदीय समितियों समेत इसकी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।

रमेश ने एक बयान में कहा, “ग्रेट निकोबार द्वीप में केंद्र सरकार की प्रस्तावित 72,000 करोड़ रुपये की ‘बड़ी अवसंरचना परियोजना’ ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी समुदायों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

नीति आयोग के कहने पर मार्च 2021 में शुरू की गई इस परियोजना में कई खतरे दिख रहे हैं।” उन्होंने यह बयान ‘एक्स’ पर भी पोस्ट किया।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस सभी मंजूरियों को तत्काल स्थगित करने तथा प्रस्तावित परियोजना की संबंधित संसदीय समितियों सहित पूरी निष्पक्ष समीक्षा की मांग करती है।”

उन्होंने दावा किया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 13,075 हेक्टेयर वन भूमि को अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए “सैद्धांतिक” मंजूरी दे दी है।

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