Homeदेशआखिर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भीतर क्यों मचा है घमासान ?

आखिर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भीतर क्यों मचा है घमासान ?

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अखिलेश अखिल 

छत्तीसगढ़ में चुनवी परिणाम क्या होंगे यह तो तीन दिसंबर को पता चलेगा लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के भीतर का तापमान बढ़ा हुआ है। हालांकि पार्टी इस बात को लेकर सहमत है कि कांग्रेस फिर से सत्ता में लौट रही है लेकिन प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर टीएस सिंह देव और बघेल के बीच खेल जारी है। कह सकते हैं कि तनातनी शुरू हो गई है। इसका अंजाम क्या होगा इसे देखने की जरूरत है।    
   पार्टी सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अंदर फिर घमासान होने वाला है। उसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य के उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता टीएस सिंहदेव ने ऐलान कर दिया है कि उनको मुख्यमंत्री बनना है। उन्होंने कहा कि अगर वे मुख्यमंत्री नहीं बने तो फिर चुनाव नहीं लड़ेंगे। सिंहदेव ने कहा कि यह बात उन्होंने चुनाव से पहले नहीं कही क्योंकि पहले कहने से कांग्रेस का चुनाव अभियान प्रभावित होता। चुनाव के बाद उनके यह कहने का नतीजों पर असर नहीं होगा लेकिन चुनाव बाद के हालात पर बड़ा असर होगा।          
    सिंहदेव के साथ साथ उनके परिवार के लोगों ने भी मतदान समाप्त खत्म होते ही कहना शुरू कर दिया कि उनको मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि 2018 में कांग्रेस के प्रचंड बहुमत हासिल करने के बावजूद ढाई साल बाद सिंहदेव ने मुख्यमंत्री का राग छेड़ा था और कहा था कि पार्टी ने वादा किया था कि ढाई साल बाद भूपेश बघेल को हटा कर उनको सीएम बनाया जाएगा। हालांकि उस समय शक्ति प्रदर्शन में वे पिछड़ गए थे और बघेल पूरे पांच साल बने रहे।
                बता दें कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने सिंहदेव को उप मुख्यमंत्री बनाया था। उनके मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी ने उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा है लेकिन मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल और पार्टी आलाकमान द्वारा किया जाएगा। इस तरह उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी उनके चेहरे पर लड़ी है और अगर जीतती है तो वे ही सीएम पद के दावेदार हैं।           
      दूसरी ओर टीएस सिंहदेव के दावेदारी है, जिससे कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ी है। पिछली बार भाजपा सिर्फ 15 सीट जीत पाई थी इसलिए वह मध्य प्रदेश जैसा खेला छत्तीसगढ़ में नहीं कर पाई थी। अगर इस बार कांग्रेस उतनी सीटें नहीं जीत पाती है और भाजपा से थोड़ा ही आगे रहती है तो कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं के झगड़े में राज्य में उलटफेर हो सकता है। कांग्रेस के लिए इसे रोकना आसान नहीं होगा। तभी कहा जा रहा है कि कांग्रेस में बहुमत का मार्क भले 46 सीट का है, लेकिन कांग्रेस को 55 से ज्यादा सीटें जीतनी होंगी।

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