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आखिर सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी को आर्टिकल 217 पढ़ने की क्यों दी सलाह ?

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न्यूज़ डेस्क 
कॉलेजियम प्रणाली को लेकर चल रहे बहस के बीच बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी को संविधान की धारा 217 पढ़ने की सलाह दी है। स्वामी ने अपने ट्वीट के जरिये कहा कि ”मैं प्रधानमंत्री को सिफारिस करता हूँ कि वे संविधान की धारा 217 को पढ़े ,जो हिंदी और संस्कृत में भी उपलब्ध है। यह धारा स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति के माध्यम से केवल उच्च न्यायलय  न्यायधीशों पर निर्णय ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए यह सीजेआई और उनकी गठित समिति का विशेषाधिकार है।”

बता दें कि पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब कॉलेजियम को लेकर बहस जारी है। यह बहस केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान के बाद शुरू हुई थी जिसमें उन्होने जजों की नियुक्ति करने की पूरी प्रक्रिया को ही ‘संविधान से परे’ बता दिया था। उन्होने कहा था कि मैं न्यायपालिका या न्यायाधीशों की आलोचना नहीं कर रहा हूँ। मैं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से ख़ुश नहीं हूँ। कोई भी प्रणाली सही नहीं है। हमें हमेशा एक बेहतर प्रणाली की दिशा में प्रयास करना और काम करना है।

उप-राष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़, लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला भी कह चुके हैं कि न्यायापालिका, विधायिका के अधिकारों का अतिक्रमण कर रही है।

दरअसल पिछले दिनों क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति करने वाले कॉलेजियम में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव देते हुए चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखा है। उन्होने अपने पत्र में मांग की कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम में सरकार का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

बता दें कि अभी मौजूदा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। वहीं हाई कोर्ट कॉलेजियम में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और हाई कोर्ट के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। अहम बात यह है कि कॉलेजियम जिन नामों की सिफारिश देता है वो बाध्यकारी हैं।

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