फिल्म धुरंधर ने निर्माता और निर्देशकों के साथ-साथ उसके अभिनेताओं को तो मालामाल किया ही। इसके समीक्षकों के लिए भी बड़ा अवसर प्रदान किया है। राव के एजेंट के रूप में हमजा अली मजारी की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह ने पर्दे पर ही सही लेकिन ऐसा कई रहस्योद्घाटन किया है जिससे अपने देश में एक बड़ा सवाल,यह खड़ा हो गया की पर्दे पर का विलन चाहे कोई भी रहे लेकिन असली विलेन कौन है ,जो हमारे अपने ही देश को विदेशी और वह भी खासकर पाकिस्तानी एजेंट से मिलकर बर्बाद करने में तुला है?
हमारे देश की सरकार को ऑपरेशन सिंदूर चलाना पड़ा। इस ऑपरेशन को रुकवाने में ट्रंप की कोई भूमिका थी या नहीं, इस पर हमारे देश में लंबे समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। अलबत्ता इसे लेकर हर कोई कम से कम इस बात पर तो जरूर सहमत हैं कि पहलगाम में आतंकियों ने हमारे देश के 26 लोगों की जान ने ले ली थी और इन आतंकियों के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। पाकिस्तान और पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अक्सर भारत में ऐसे अमानवीय कृत्यों को अंजाम देते रहते हैं।
ऐसे में फिल्म धुरंधर में दिखाया गया वह दृश्य जिसमें एक राजनेता पिता और उसका पुत्र नकली नोट के धंधे में पाकिस्तान के साथ संलिप्त है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। गंभीर चिंता का विषय इसलिए है , क्योंकि आम मनोरंजक फिल्मों से हटकर फिल्म धुरंधर भारत की प्रमुख जासूसी एजेंसी रॉ के अभियानों के आधार पर कुछ मसाला मिलाकर बनायी गई फिल्म है।
फिल्म धुरंधर में नकली मुद्रा के पाकिस्तान से भारत लाने में राजनीति के जिस मंत्री पिता -पुत्र का वर्णन हुआ है ,वह असल में कौन है? फिल्म धुरंधर के आने के बाद और कोई नहीं सही लेकिन भारत सरकार को तो इसकी तलाश कर इस नाम को उजागर करना ही चाहिए। नाम स्थान न जाहिर करने के पीछे फिल्मों की अपनी मजबूरी हो सकती है ,लेकिन अगर इशारे ही इशारे में उसने इतनी बड़ी बात कह दी है, तब अगर सरकार फिल्म के इशारे को समझते हुए भी ऐसे देशद्रोही पिता पुत्र जो मंत्री रहते हुए इस नकली भारतीय मुद्रा के धंधे में लगे हुए थे, उसका नाम जाहिर कर उसे पर की जाने वाले कार्यवाही की जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंचाती है तो फिर सरकार पर भी सवालिया निशान लगना तय ही है ।धुरंधर फिल्म देखने के बाद अब जनता अपने मन में उठने वाले नकली नोट के गोरखधंधे मैं शामिल मंत्री पिता और उसके पुत्र के बारे में जवाब जरूर जानना चाहती है।
इस मामले में शक की सुई भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उसके बेटे कार्तिक चिदंबरम की तरफ जाती दिखाई पड़ती है। जब पी चिदंबरम 2004 में वित्त मंत्री थे, तब उनके मंत्रालय ने ब्रिटेन स्थित एक कंपनी ‘डे ला रु को 2015 तक भारतीय मुद्रा यानी नोट छापने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। डे ला रू वही कंपनी है जो पाकिस्तान की मुद्रा भी छापती है, जिससे थोड़ा हेर फेर कर इस कंपनी से सांठगांठ कर भारत की सरकार को सूचना दिए बिना पाकिस्तान भेज कर और फिर भारत और पाकिस्तान के एजेंट के द्वारा सत्ता के समर्थन से वापस भारत में काला धन के रूप में भारतीय मुद्रा को लाना कोई बड़ी बात नहीं है।
पाकिस्तान से बड़ी मात्रा में नकली भारतीय नोट के देश में आने के आधार पर जब पी चिदंबरम के बाद 2009 मैं प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री बने तब 2010 ईस्वी में उन्होंने डे ला रू को प्रतिबंधित कर दिया। राष्ट्रपति बनने से पूर्व 2012 तक जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे ,तब तक इस ब्रिटेन स्थित डे ला रू कंपनी ब्लैकलिस्टेड थी।
प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद पी चिदंबरम जब दुबारा 2012 ईस्वी में भारत के वित्त मंत्री बने तो उन्होंने डे ला रु को ब्लैकलिस्टेड से सामान्य बनाते हुए एक बार फिर से से भारतीय मुद्रा छापने की जिम्मेवारी दे दी। इस दौरान उनके बेटे कार्तिक चिदंबरम के बार-बार ब्रिटेन जहां डे ला रू कंपनी है,वहां जाने की चर्चा हो रही थी। इस आधार पर ही फिल्म धुरंधर के आने के बाद अब उसमें दिखाएं मंत्री पिता और पुत्र के रूप में पुर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्तिक चिदंबरम की चर्चा हो रही है। इस चर्चा में सत्यता कितनी है यह तो जांच एजेंसी और भारत सरकार ही बता सकती है ,लेकिन धुरंधर फिल्म देखने के बाद लोग बेसब्री से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार इस बात का खुलासा करें कि सही क्या है और गलत क्या है ? और अगर यह बात सही है तो फिर पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्तिक चिदंबरम को जेल के अंदर करें। गौरतलब है कि 2014 के बाद डे ला रू को नए अनुबंध नहीं दिए गए, जिससे भारत ने नोट उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।
