कौन है स्वीडन में कुरान जलाने वाला सलवान मोमिका,जिसकी हरकत से उबले हैं इस्लामिक देश

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बीरेंद्र कुमार झा

स्वीडन में एक मस्जिद के बाहर कुरान जलाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस घटना से पाकिस्तान सहित सऊदी अरब से लेकर इराक तक इस्लामिक देशों में उबाल है। यहां तक कि गुरुवार को तो इराक में स्वीडन के दूतावास में ही आग लगा दी गई। यही नहीं इराक ने स्वीडन के राजदूत को देश से बाहर निकाल दिया है और अपने राजनीति को भी वापस बुला लिया है।स्वीडन की कंपनियों से सारा कारोबार भी बंद कर दिया गया है। दरअसल बीते महीने कुरान जलाए जाने की घटना हुई थी,जिस पर गुस्सा थमा भी नहीं था कि एक बार फिर से गुरुवार को ऐसा ही करने की कोशिश की गई।

कौन है सलमान मोमीका

इस घटना को अंजाम देने वाला शख्स सलमान मोमीका है।27 साल का सलमान मोमीका, मूल रूप से इराक का ही रहने वाला है, लेकिन फिलहाल वह शरणार्थी के तौर पर स्वीडन में रह रहा है।ईसाई धर्म को मानने वाला सलमान मोमीका 2018 में इराक में हालत बिगड़ने पर स्वीडन चला गया था।फिर 2021 में इसे शरणार्थी का दर्जा मिल गया था।वह खुद को नास्तिक कहता है। बीते महीने सलमान मोमीका ने एक मस्जिद के बाहर कुरान को आग में झोंक दिया था, इस पर दुनिया भर के इस्लामिक देशों में गुस्सा भड़क गया था।

स्वीडन से क्यों नाराज है इस्लामिक देश

पाकिस्तान के संसद में भी इस घटना को लेकर एक निंदा प्रस्ताव पारित हुआ और 1 दिन देशभर में स्वीडन के खिलाफ प्रदर्शन हए ।इस मामले में स्वीडन के खिलाफ भी गुस्से की वजह यह है पहले पुलिस ने कुरान के खिलाफ आंदोलन को बैन कर दिया था,लेकिन बाद में वहां की एक अदालत ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इस की छूट दे दी।अब इसी को लेकर सऊदी अरब, इराक,पाकिस्तान समेत दुनियाभर के इस्लामिक देश खफा है और स्वीडन की निंदा कर रहे है।हालांकि इराक में स्वीडन के दूतावास पर अटैक करने वालों पर एक्शन लिया गया है और 20 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र में भी गूंजा मामला,भारत का क्या रहा रुख

इस मामले की गूंज संयुक्त राष्ट्र में भी सुनाई दी है। इसी महीने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इस मसले पर निंदा प्रस्ताव लाया गया था। इस्लामिक देशों के संगठन के प्रस्ताव का भारत पाकिस्तान ,श्रीलंका, बांग्लादेश और साऊदी अरब समेत कई देशों ने समर्थन किया था। इस प्रस्ताव के समर्थन में 28 और विरोध में 12 वोट पड़े।जिन देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था उसने ब्रिटेन, फ्रांस जर्मनी कोस्टारिका और मोंटेंनिगरो शामिल है।

 

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