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वसुंधरा राजे की रिटायरमेंट योजना सफल, राजनीति छोड़ने की जगह भरे नामांकन के परचे

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बीरेंद्र कुमार झा
बीजेपी आला कमान की ओर से राजस्थान विधानसभा चुनाव में स्पष्ट संकेत मिलने की बावजूद वसुंधरा राजे सिंधिया राजनीतिक वर्चस्व बनाने से पीछे हटने को तैयार नहीं है।पार्टी वाला कमान ने भले वसुंधरा राजे की जिद के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार या चुनाव प्रचार का समिति का मुखिया घोषित नहीं किया हो लेकिन राजस्थान की राजनीति की चतुर खिलाड़ी वसुंधरा राजे ने चुनावी मैदान में अपना स्थान महफूज कर ही लिया। वसुंधरा राजे सिंधिया ने आलाकमान के राजनीतिक मूड और राज्य स्तर के नेताओं की तैयारी को देखते हुए ग्राउंड जीरो पर फोकस किया। लगातार पांचवीं बार न केवल झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से अपना टिकट सुनिश्चित किया बल्कि अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को टिकट मिले इस बात को भी सुनिश्चित करने पर पूजा प्रयास किया।

अपने समर्थकों के लिए लगातार किया प्रयास

पार्टी के नेता ने बताया कि चाहे चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के घर पर राजस्थान बीजेपी कोर कमेटी के नेताओं की बैठक हो या पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर बैठक या फिर पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हो वसुंधरा राजे हर बैठक में अपने समर्थकों को जीतने वाला उम्मीदवार बताते हुए उनकी जोरदार पैरवी करती नजर आई।कई बार इसके लिए वसुंधरा राजे सिंधिया को बैठक के अंदर अन्य नेताओं के साथ जोरदार बहस भी करनी पड़ी।

वसुंधरा के बदले वर्किंग स्टाइल ने सबको चौकाया

वसुंधरा की वर्किंग स्टाइल को जानने वाले नेताओं के लिए यह किसी असंभव से कम नहीं था। बीजेपी राजस्थान के लिए अब तक 184 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है और पार्टी उम्मीदवारों की यह चारों लिस्ट अपने आप में बताती है कि वसुंधरा राजे सिंधिया ने पहली लड़ाई जीत ली है। वसुंधरा राजे सिंधिया भले ही पूरी तैयारी के बावजूद कैलाश मेघवाल,राजपाल सिंह शेखावत, अशोक प्रणामी और यूनुस खान जैसे एक दर्जन से ज्यादा करीबियों को टिकट दिलाने में कामयाब नहीं हो पाई, लेकिन इन्होंने अपने ज्यादातर समर्थकों को टिकट दिलाने में सफलता प्राप्त की है।

इन समर्थकों को टिकट दिलाने में रही कामयाब

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी जोरदार पैरवी से कालीचरण शराफ, वासुदेव देवनानी, अनिता पटेल,और पुष्पेंद्र सिंह राणावत को टिकट दिलाया।7से अलावा वे जगसीराम कोली,प्रताप लाल कमेटी, गोपीचंद मीणा, अशोक डोगरा,प्रताप सिंह, देवी सिद्धि कुमारी, सुरेंद्र सिंह राठौड़ और दिप्ती माहेश्वरी सहित अपने 52 के लगभग समर्थकों को कोई टिकट दिलाने में कामयाब रही।

बीजेपी ने घोषित किया 184 कैंडिडेट्स के नाम

184 उम्मीदवारों में से 52 वसुंधरा राजे सिंधिया के समर्थक हैं, हालांकि राजस्थान बीजेपी के नेता की माने तो बाकी उम्मीदवारों में से भी 15 से 20 उम्मीदवार ऐसे हैं जो किसी के पाले में नहीं है,लेकिन उन्हें भी चुनाव जीतने के लिए वसुंधरा राजे की मदद की स है बाकी बच्ची 16 सीटों पर भी वसुंधरा राजे अपने एक दर्जन के लगभग करीबियों को टिकट दिलाने की जोरदार पैरवी कर रही है। समर्थकों को टिकट दिलवाने के मामले में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत,केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और लोकसभा अध्यक्ष एवं सांसद एवं बिरला यहां तक की प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। यार

राजे समर्थक यूनुस खान करेंगे दावेदारी

वहीं दूसरी तरफ वसुंधरा के करीबी और राजस्थान में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम चेहरा यूनुस खान ने एक अलग रुख तैयार किया है। उन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ने और निर्दलीय लड़ने कए ऐलान कर बीजेपी आला कमान पर जोरदार हमला बोला है। वहां यह गौर करने वाली बात है कि अगर राजस्थान में किसी को बहुमत नहीं मिला तो निर्दलीय विधायक सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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