क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तख्ता पलट या हत्या का था षडयंत्र,किसकी ही सकती है इसमें भूमिका

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13 मार्च 2026 NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक समेत 6 यूक्रेनी नागरिक को भारत में आतंकी गतिविधियों और अवैध ड्रोन गतिविधियों से जुड़े एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया है। हालांकि, शुरुआती खबरों में इन्हें HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के आसपास पकड़े जाने की बात सामने आ रही थी, लेकिन आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ये गिरफ्तारी मिजोरम-म्यांमार सीमा के पास प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध रूप से घुसने और वहां से म्यांमार के विद्रोही समूहों को ड्रोन व हथियारों की ट्रेनिंग देने से संबंधित हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से ,जबकि यूक्रेनी नागरिकों में से तीन को दिल्ली और तीन को लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। इसके बाद इन सभी को पटियाला कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 27 मार्च तक के लिए पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है।

इस गिरफ्तारी के बाद से अब एक बड़ा प्रश्न चिन्ह यह उठने लगा है कि क्या अमेरिका यूक्रेनियों के साथ मिलकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तख्ता पलट कर देना चाहता है और बांग्लादेश की तरह जेन जी के सहारे तख्ता पलट करने की स्थिति भारत में न बनने की पर यह आतंकवादियों के सहारे पीएम मोदी की जान तक ले लेने के लिए तैयार है?
इस प्रश्न का फिलहाल कोई सटीक और आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अभी इस अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक समेत 6 यूक्रेनी नागरिकों के गिरफ्तारी के बाद मामला जांच की प्रक्रियाधीन है। और ऐसे मामले से जुड़ी बातें राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से आमतौर पर सामने भी नहीं लाया जाता है। लेकिन इससे जुड़ी अलग अलग कड़ी को अगर आप जोड़ेंगे तो आपको लगने लगेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्तापलट हर कीमत पर करने के लिए एक बड़ी श्रृंखला का तो निर्माण जरूर किया जा रहा है। खासकर इस गिरफ्तारी में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक के पूर्व के कारनामों को आप देखेंगे तो आपको कहीं ना कहीं इस षड्यंत्र की बू जरूर महसूस होने लगेगी।

तब आप इस बात को लेकर आश्चर्य करने लगेंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बताते नहीं थकते हैं,कहीं उनकी भी तो इस मामले में कोई बड़ी भूमिका नहीं है !

डोनाल्ड ट्रंप कि इसमें कोई भूमिका है या नहीं यह तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही जानते होंगे या फिर भारतीय खुफिया तंत्र और इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते होंगे। मैं तो सिर्फ उन बिंदुओं को उजागर कर रहा हूं जो इसके तरफ संकेत देते नजर आ रहे हैं। दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार लेने की सनक सवार हो गई थी, लेकिन तब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में उनकी कोई सहायता नहीं की थी। यहां तक की जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पाक युद्ध को ट्रेड डील के सहारे खत्म करवाने की बात कह कर अपने आप को नोबेल पुरस्कार का दावेदार बनाने का प्रयास किया था,तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी इस बात का भी समर्थन नहीं किया और बाद में जब विपक्षी राजनीतिक दल खासकर नेता विपक्ष राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के ऊपर भारत की संप्रभुता अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथों सौंप देने को लेकर सवाल उठाने लगे तो उन्होंने सदन में आकर यह बात स्पष्ट कर दी कि ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने में या स्थगित करने में किसी भी विदेशी नेता का कहीं से कोई हाथ नहीं है। इतना ही नहीं जब अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण टैरिफ बढ़ाना शुरू किया,जुर्माना लगाना शुरू किया तब भी पीएम मोदी झुके नहीं । तब ट्रंप के इस कार्रवाई से भारत और अमेरिका के बीच आए तनाव को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताकर एक तरह से पीएम मोदी ने यह इशारा कर दिया था कि भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन्हें अपना बड़ा दोस्त कह रहे हैं लेकिन अब दोस्ती वाली वह बात रही नहीं।

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक एकडॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, युद्ध संवाददाता और मोटरसाइकिल से उत्तर अफ्रीका-मध्य पूर्व की यात्रा करने वाले यात्री के रूप में जाना जाता है। 2008-2011 के दौरान उन्होंने लीबिया, इराक, अफगानिस्तान आदि में फिल्में बनाईं। ये वे देश हैं,जहां अमेरिका ने तख्ता पलट करवाया था।
लीबिया में तो यह गद्दाफी के खिलाफ विद्रोहियों के साथ लड़ते हुए शामिल हुआ। वह लीबिया में कैद रहा और छह महीने तक युद्धबंदी रहा। रिहाई के बाद वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चित हो गया। एक तरह से अमेरिका उसे विभिन्न देशों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए उसे देश में आतंकी या अन्य माहौल तैयार करने के लिए भेजता रहा है।

NIA के द्वारा इस अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक के गिरफ्तार होते ही अमेरिकी सरकार सक्रिय हो गई और उसके इशारे पर भारत में अमेरिकी राज दूत सर्जियो गोर ने तत्काल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। अजीत डोभाल और सर्जियों गोर की मुलाकात में किन-किन बातों पर चर्चा हुई, इस बात का तो खुलासा नहीं किया गया है ,लेकिन परिस्थिति जन्य साक्ष्य इस बात की तरफ इशारा करता है कि इन दोनों के बीच NIA के द्वारा गिरफ्तार किए गए इस अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक के मामले को रफा- दफा करने के संबंध में कुछ ना कुछ बात तो जरूर हुई होगी।

और ऐसा ही कुछ भारत में यूक्रेन के राजदूत के द्वारा भी की गई।वह भी अपने देश के नागरिकों को षड्यंत्र में शामिल नहीं होने की बात कर रहे हैं और अब तक यूक्रेनी नागरिकों को उनके राजदूत से नहीं मिलने देने को लेकर सवाल खड़ा कर रहे है।

इन तामम परिस्थितियों के बावजूद NIA के द्वारा गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों ने इस आरोप को कबूल कर लिया है।NIA की जांच में आरोपियों के कबूलनामे और सामने आए तथ्यों के अनुसार, इन्होंने निम्नलिखित बातें स्वीकार की है:-
आतंकी समूहों से संपर्क: आरोपियों ने मिजोरम के रास्ते म्यांमार में अवैध रूप से प्रवेश किया और वहां भारत विरोधी विद्रोही गुटों (Ethnic Armed Organizations) को युद्ध कौशल (Combat Training) और हथियारों का प्रशिक्षण देने की बात स्वीकार की है।
ड्रोन वारफेयर ट्रेनिंग: आरोपियों ने कबूल किया है कि वे विद्रोहियों को ड्रोन चलाने और ड्रोन के जरिए हमला करने (Drone Warfare) की ट्रेनिंग दे रहे थे।
यूरोप से ड्रोन तस्करी: जांच में पाया गया कि ये लोग यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप अवैध रूप से भारत के रास्ते म्यांमार के विद्रोही समूहों तक पहुंचा रहे थे।
प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध एंट्री: इन्होंने मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों (Protected Areas) में बिना परमिट के प्रवेश किया।
अमेरिकी नागरिक की भूमिका: पकड़े गए अमेरिकी नागरिक का नाम मैथ्यू आरोन वैन डाइक (Matthew Aaron Van Dyke) बताया जा रहा है, जो म्यांमार में विद्रोही समूहों की मदद कर रहा था।

म्यांमार में सक्रिय भारत-विरोधी जातीय सशस्त्र समूह (Indian Insurgent Groups – IIGs) पूर्वोत्तर भारत में अलगाववाद, अस्थिरता और हिंसा फैलाने के लिए विभिन्न तरीकों से काम करते हैं। ये समूह मुख्य रूप से भारत-म्यांमार सीमा के पास घने जंगलों में अपने ठिकाने बनाकर, दोनों देशों की छिद्रपूर्ण (porous) सीमा का लाभ उठाते हैं।

इन समूहों की कार्यप्रणाली के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
सुरक्षित ठिकाने और प्रशिक्षण शिविर: NSCN-K, ULFA(I), PLA, और NDFB जैसे भारत-विरोधी उग्रवादी समूह म्यांमार के सागिंग क्षेत्र (Sagaing Region) और उत्तरी क्षेत्रों में अपने प्रशिक्षण शिविर और ठिकाने चलाते हैं। ये शिविर भारतीय सुरक्षा बलों (जैसे असम राइफल्स) की कार्रवाई से बचने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
सीमा पार से हमले (Hit-and-Run): ये समूह म्यांमार में शरण लेते हैं और वहां से भारत (विशेषकर मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश) में घुसपैठ करके सुरक्षा बलों और बुनियादी ढांचे पर हमले करते हैं।
म्यांमार के जुंटा के साथ गठबंधन: 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद, कई भारतीय विद्रोही संगठन (IEAOs) म्यांमार के सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा (Tatmadaw) के साथ गठबंधन में काम कर रहे हैं। बदले में, जुंटा इन्हें म्यांमार के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने और जुंटा-विरोधी प्रतिरोध समूहों के खिलाफ लड़ने की अनुमति देता है।

NIA के द्वारा अमेरिकी नागरिक मैथ्यू समेत 6 यूक्रेनियों का गिरफ्तार होना भारतीय खुफिया तंत्र की जबरदस्त सफलता मानी जा रही है। इससे एक तरफ जहां अमेरिका यूक्रेन समेत उन देशों के राष्ट्रध्यक्षों का खुलासा हो जाएगा जो ऊपर से तो पीएम मोदी को दोस्त बताते हैं और पीठ पीछे छुरा भोकते का प्रयास करते हैं। इसके अलावा उन संगठन और उनके नेताओं का भी खुलासा हो जाएगा जो ऐसे आतंकी समूह से मिलकर मोदी का तख्तापलट या उसकी हत्या तक करने के षड्यंत्र में शामिल है। खासकर जिस तरह से विपक्षी राजनीतिक दल के नेताओं के द्वारा पीएम मोदी के मणिपुर नहीं आने के मामले को उनकी कायरता बताना, उनकी 56 इंच की छाती का गायब होना जैसी बात कहकर मणिपुर जाने के लिए उकसाता जा रहा था उसे देखते हुए उनके इस क्रियाकलाप की जांच NIA के द्वारा गिरफ्तार किए गए एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के संदर्भ में की जानी चाहिए।

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