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उत्तर प्रदेश विधानसभा में 58 साल के बाद लगा कोर्ट, ऐतिहासिक फैसले के साक्षी बने विधायक

Published on

  • बीरेंद्र कुमार झा

उत्तर प्रदेश विधानसभा में 58 साल के बाद शुक्रवार को अदालत लगी। यह ऐतिहासिक मौका सदन में 58 साल बाद आया है। कटघरे में 6 पुलिसकर्मियों को पेश किया गया। इन सभी पुलिसकर्मियों पर विशेषाधिकार हनन का आरोप था।इससे पहले 14 मार्च 1964 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पूर्व सांसद नरसिंह नारायण पांडे ने एक सदस्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

क्या है मामला

यह पूरा मामला 2004 ईस्वी का है। तब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी ।मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे ।कानपुर में प्रदर्शन के दौरान बीजेपी विधायक और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। समाजवादी पार्टी सरकार में, बिजली कटौती के विरोध में सलिल विश्नोई कानपुर में धरने पर बैठे थे।इस दौरान बीजेपी के विधायक और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इस काठी चार्ज में तत्कालीन विधानसभा सदस्य सलिल विश्नोई की टांग टूट गई थी वे कई महीने तक बेड पर रहे ।इसके बाद उन्होंने विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना की सूचना 25 अक्टूबर 2004 को विधानसभा सत्र में रखी थी। इस मामले में 17 साल पहले पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया जा चुका है। शुक्रवार को पुलिसकर्मियों की सजा का ऐलान हुआ

क्या मिली सजा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की अवमानना कि इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने की। इन्होंने पुलिस कर्मियों को 1 दिन की सजा सुनाई। इसके बाद इन पुलिसकर्मियों को विधानसभा में बने लॉकअप में ही 1 दिन गुजारना होगा। ये पुलिसकर्मी शुक्रवार की रात 12:00 बजे तक विधानसभा में बने लॉकअप में रहेंगे। इस अवसर पर बोलते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा की इस दौरान इन पुलिसकर्मियों के साथ किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं होगा। इस दौरान इन्हें भोजन पानी आदि सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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