Homeदेशकेंद्र की पीएमश्री योजना, केंद्र और बंगाल, दिल्ली और पंजाब का टकराव

केंद्र की पीएमश्री योजना, केंद्र और बंगाल, दिल्ली और पंजाब का टकराव

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पीएम श्री यानि ( प्राइम मिनिस्टर स्कूल फॉर राइजिंग स्कूल) योजना केंद्र सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसके तहत देश भर के 14,500 पुराने स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। पीएम श्री योजना का लक्ष्य स्कूली शिक्षा को अपग्रेड करना है ताकि बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जा सके और वे इस तरह ट्रेंड हों कि 21 सदी की चुनौतियों से भलीभांति निपट सकें।

पीएम श्री योजना के तहत बच्चों को स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जाएगी और उन्हें नई तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में अध्ययन कक्ष बनाए जाएंगे,बेंच-डेस्क लगाएं जाएंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर की वो तमाम चीजें उपलब्ध कराई जाएंगी, जो एक स्कूल में बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 सितंबर 2022 को शिक्षक दिवस के मौके पर इस योजना की शुरुआत की थी।उन्होंने बताया था कि इस योजना के तहत देश के 14,500 स्कूलों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। यह स्कूल पूरी तरह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ही काम करेंगे।यह योजना पांच साल के लिए होगी और इस योजना पर जो खर्च आएगा उसका 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।इस योजना के तहत पांच साल की अवधि के लिए कुल बजट 27360 करोड़ का होगा और योजना का उद्देश्य 21 सदी की तकनीक से बच्चों का संपूर्णता में विकास करना होगा।

पीएम श्री योजना का जब शुभारंभ हुआ, उस वक्त राज्य सरकारों को एक एमओयू केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ साइन करना था, ताकि इस योजना को राज्यों में लागू किया जा सके। अधिकतर राज्यों ने एमओयू साइन कर लिया, लेकिन बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु, केरल और दिल्ली इस एमओयू को साइन करना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसके लिए पहल नहीं की।

इन राज्यों की पहल न करने की वजह यह थी कि केंद्र सरकार, राज्यों द्वारा संचालित स्कूलों का चयन इस योजना के तहत कर रही है और जिस स्कूल का चयन इस योजना के तहत हो जाता है उसका नाम पीएम श्री योजना के तहत रख दिया जा रहा है।मसलन अगर कोई स्कूल राजकीय मध्य विद्यालय है तो इस योजना के तहत उसका नाम बदलकर पीएम श्री राजकीय मध्य विद्यालय हो जाएगा।इस योजना के तहत केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय का भी चयन किया जा रहा है।

इस योजना में 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारों को करना है, लेकिन योजना संचालित करने का श्रेय पूरी तरह केंद्र सरकार को जा रहा है, यही वजह है कि पश्चिम बंगाल,दिल्ली जैसे कुछ राज्य इस योजना को अपने प्रदेश में लागू करने से मना कर रहे हैं।लेकिन जब केंद्र ने सख्त रुख अपनाया और फंडिंग रोकने की बात की तो तमिलनाडु और केरल ने तो एमओयू साइन कर लिया, लेकिन बंगाल, पंजाब और दिल्ली अभी भी अड़े हुए हैं।इन तीनों ही राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार है, परिणाम यह हुआ है कि केंद्र ने इन राज्यों में स्कूली शिक्षा के लिए व्यापक कार्यक्रम की फंडिंग रोक दी है। इससे केंद्र और इन तीन राज्यों के बीच का विवाद अभी भी जारी है।

 

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