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मणिपुर का सच : अब तक 175 लोगों की मौत ,11 सौ से ज्यादा लोग घायल और 4786 घर आग के हवाले !

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न्यूज़ डेस्क 


वैसे तो मणिपुर में आज भी हिंसा जारी है लेकिन कोशिश यह भी हो रही है कि मणिपूर शांत हो जाए और दोनों समुदाय के बीच की दूरी भी कम हो जाए। लेकिन सरकार और कई सामाजिक संगठनों के इस प्रयास के बाद भी मणिपुर अशांत है और कब कहा हिंसा भड़क जाए कोई नहीं जानता। बता दें कि मणिपुर में चार महीनों से हिंसा जारी है। तीन मई को भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 175 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं, एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।                   
 इसी बीच आईजीपी (ऑपरेशन्स) आईके मुइवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मणिपुर में फिलहाल हालात सही नहीं हैं। हालांकि हम शांति लाने के लिए हर संभव कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम राज्य के लोगों को आश्वस्त कर सकते हैं कि पुलिस, केंद्रीय बल और नागरिक प्रशासन सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए चौबीसों घंटे प्रयास कर रहे हैं।

            मुइवा ने कहा कि मई की शुरुआत में जातीय हिंसा भड़की थी। तब से लेकर अबतक कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें से नौ अभी भी लापता हैं। वहीं, 1,108 घायल हुए, जबकि करीब 32 लोग लापता हैं।
                    अधिकारी ने कहा कि लापता हथियारों में से 1,359 आग्नेयास्त्र और 15,050 गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। बता दें, हिंसा के दौरान कथित तौर पर दंगाइयों ने पुलिस के बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद लूट लिए थे। मुइवा ने बताया कि उपद्रवी कुल 4,786 घरों को आग के हवाले कर चुके हैं। आगजनी के कम से कम 5,172 मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान 254 चर्चों और 132 मंदिरों को भी तोड़ा गया।
                       आईजीपी ने कहा कि बिष्णुपुर जिले के फौगाचाओ इखाई से चुराचांदपुर जिले के कांगवई तक सुरक्षा बैरिकेड हटा दिए गए हैं। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि 69 शवों की पहचान हो चुकी है। शेष 96 शवों पर दावा नहीं किया गया है। रिम्स और जेएनआईएमएस में क्रमशः 28 और 26 शव रखे गए हैं, जबकि 42 चुराचांदपुर अस्पताल में हैं।
                     गौरतलब है, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति  का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

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