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मिडिल ईस्ट में ट्रंप के साथ हो जाएगा खेल! ईरान को क्रूज मिसाइल देगा चीन

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अमेरिका की ओर से बार-बार दी जा रही धमकी को बीच अब ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब देने की तैयारी कर ली है।चीन ने ईरान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका के बीच चीन, ईरान को अपनी सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 बेचने के करीब है। यह डील ऐसे समय में हो रहा है जब ईरानी समुद्री तट पर अमेरिका अपनी नेवी की तैनाती की है, जिसमें दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford शामिल हैं।

चीन का CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल करीब 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और दुश्मन के जहाजों को बहुत कम समय में तबाह कर सकती है। इस मिसाइल को कम ऊंचाई पर और तेज स्पीड से उड़कर जहाजों पर लगे डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन किया गया है।ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर ईरान को यह मिसाइलें मिल गईं तो यह क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पिछले दो सालों से इस डील को अंतिम रूप देने को लेकर बातचीत कर रहा था।पिछले साल अमेरिका की ओर से ईरान पर हमला करने के बाद इस डील में तेजी आई। इजरायल के पूर्व खुफिया अधिकारी डैनी सिट्रिनोविच ने दावा किया है कि ये मिसाइलें अमेरिकी नेवी को काफी नुकसान पहुंचा सकती है।उन्होंने कहा कि अगर ईरान के पास इस क्षेत्र में जहाजों पर हमला करने की सुपरसोनिक क्षमता होगी तो स्थिति पूरी तरह से बदल जाएगी। इन मिसाइलों को रोकना बहुत मुश्किल है।

रिपोर्ट के मुताबिक दो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल गर्मी में डील को लेकर जब बातचीत अंतिम फेज में पहुंची तो उप रक्षामंत्री मसूद ओराई सहित वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने चीन का दौरा किया था। ओराई की इस यात्रा की जानकारी पहले नहीं दी गई थी। ईरान के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेहरान के अपने सहयोगियों के साथ सैन्य और सुरक्षा समझौते हैं और अब इन समझौतों का उपयोग करने का सही समय है।

व्हाइट हाउस ने कथित वार्ता पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि या तो हम समझौता करेंगे या हमें पिछली बार की तरह कोई बहुत सख्त कदम उठाना पड़ेगा। चीन ईरान को जो मिसाइल देने वाला है, वह उसके सबसे एडवांस हथियारों में से एक है।यह संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन भी है, जिसे पहली बार साल 2006 में लगाया गया था।हालांकि 2015 इसे अमेरिका के साथ परमाणु डील के हिस्से के रूप में निलंबित कर दिया गया था और पिछले सितंबर में फिर से लागू किया गया था।

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