स्पेन की एक रिसर्च टीम ने दावा किया है कि उसने पैंक्रियाटिक कैंसर के सबसे खतरनाक रूप को लैब में चूहों से पूरी तरह खत्म करने वाला इलाज विकसित किया है। यह कैंसर दुनिया के सबसे जानलेवा कैंसरों में गिना जाता है।यह स्टडी स्पेन के नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (CNIO) में साइंटिस्ट मारियानो बार्बासिद के नेतृत्व में किया गया।चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर क्या-क्या दावा किया गया है।
रिसर्च के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने तीन दवाओं के एक नए कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया, जिससे चूहों में मौजूद पैंक्रियाटिक ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि इलाज के बाद दोबारा कैंसर लौटने के कोई संकेत नहीं मिले। छह साल तक चली इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि इलाज से जानवरों पर बहुत कम साइड इफेक्ट पड़े।पैंक्रियाटिक कैंसर, खासतौर पर पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा, इसलिए जानलेवा माना जाता है क्योंकि यह इलाज के प्रति बेहद प्रतिरोधी होता है और अक्सर देर से पकड़ में आता है। आमतौर पर एक दवा पर आधारित इलाज इसलिए फेल हो जाता है।
CNIO की यह नई थेरेपी अलग रास्ता अपनाती है।इसमें एक नहीं, बल्कि तीन दवाओं को मिलाकर कैंसर की कई जीवन-रक्षक प्रक्रियाओं को एक साथ बंद किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे कैंसर सेल्स को खुद को दोबारा ढालने का मौका ही नहीं मिलता। लैब में किए गए प्रयोगों में पाया गया कि उन्नत अवस्था के पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित चूहों में ट्यूमर पूरी तरह गायब हो गए। लंबे समय तक निगरानी के बावजूद ट्यूमर दोबारा नहीं उभरा, जो इस बीमारी में बेहद दुर्लभ माना जाता है।
इस स्टडी को प्रतिष्ठित जर्नल Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में पब्लिश किया गया है। समीक्षकों ने इलाज के लंबे समय तक असर और कम नुकसान को खास तौर पर हाईलाइट किया है। कैंसर एक्सपर्ट का कहना है कि बिना दोबारा कैंसर लौटे ऐसे नतीजे पैंक्रियाटिक कैंसर रिसर्च में बेहद असामान्य हैं। इस खोज के बाद सोशल मीडिया पर उत्साह के साथ-साथ संदेह भी देखने को मिला।कुछ लोगों ने इसे इलाज की दिशा में बड़ी छलांग बताया, तो कुछ ने इसे सीधे ‘क्योर’ कहे जाने पर सवाल उठाए। विशेषज्ञों का कहना है कि चूहों में मिली सफलता के बाद अभी इंसानों पर ट्रायल और लंबी प्रक्रिया बाकी है।
पैंक्रियाटिक कैंसर वह बीमारी है जो पैंक्रियाज में सेल्स की असामान्य वृद्धि से शुरू होती है।पैंक्रियाज पेट के निचले हिस्से के पीछे होता है और यह पाचन में मदद करने वाले एंजाइम तथा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाता है। इसका सबसे आम प्रकार पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा होता है।
यह कैंसर शुरुआती दौर में अक्सर पकड़ में नहीं आता, क्योंकि लक्षण देर से दिखाई देते हैं।इसके लक्षणों में पेट या पीठ में दर्द, वजन कम होना, भूख न लगना, पीलिया, पेशाब का रंग गहरा होना, थकान और अचानक डायबिटीज बढ़ना शामिल है। ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इसमें 80 से 85 प्रतिशत मामलों के लक्षण देर से दिखाई देते हैं और सिर्फ 10 प्रतिशत मरीज ही 5 साल तक जिंदा रह पाते हैं।
