टिपरा मोथा बनाएगी त्रिपुरा में सरकार!

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  • बीरेंद्र कुमार झा

त्रिपुरा में 16 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। इसके बाद 2 मार्च को वहां के चुनाव परिणाम आएंगे। त्रिपुरा में वही पार्टी सरकार बनाएगी जिसे वहां या तो खुद का बहुमत प्राप्त होगा या उसके गठबंधन वाले दल को बहुमत प्राप्त होगा। लेकिन टिपरा मोथा ने बिना चुनाव हुए ही वहां अपनी पार्टी की सरकार बनाने का दावा कर दिया है। और यह घोषणा खुद टिपरा मोथा के अध्यक्ष विजय कुमार हरंगखाल ने की है। घोषणा करने के बाद हरंगखाल ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी यानि टिपरा मोथा ने गुवाहाटी में चुनाव से पहले होने वाले गठबंधन की संभावना को लेकर मीटिंग भी की थी। इस मीटिंग में असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी के दो नेताओं से उनकी मुलाकात हुई, लेकिन इस मीटिंग का कोई परिणाम नहीं निकल पाया।

टिपरा मोथा त्रिपुरा में सरकार बनाने का पेश कर सकती है अपना दावा

त्रिपुरा विधानसभा के लिए होने जा रहे चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के बाद यदि किसी दल अथवा गठबंधन को बहुमत नहीं मिला तो ऐसी स्थिति में टिपरा मोथा राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। पार्टी के अध्यक्ष विजय कुमार हरखंगाल ने यह बात कही है। प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अपनी पैठ बना चुका क्षेत्रीय दल टिपरा मोथा विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में उस दल या गठजोड़ को बाहर से समर्थन देने का इच्छुक है, जो अलग आदिवासी राज्य बनाने की तीव्रता की मांग का लिखित रूप से सदन के पटल पर समर्थन करने की बात करेगा।

इंडिजेनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ ट्वीपरा की थी स्थापना

देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले वरिष्ठ आदिवासी नेता ने इंडिजिनियस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ ट्वीपरा की स्थापना की थी। इस पार्टी का 2 साल पहले ही टिपरा मोथा में विलय हो गया था। टिपरा मोथा प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व शाही परिवार के वंशज प्रद्युत किशोर मानिक देव वर्मा के साथ रणनीति पर चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर संवैधानिक गतिरोध पैदा होता है और कोई पार्टी या गठबंधन सरकार गठन में नाकाम रहता है तो हम राज्यपाल से संपर्क कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। बावजूद इसके कि यह जानते हुए भी कि हम संभवतः सरकार नहीं चला पाए क्योंकि दूसरे दल हमारे खिलाफ एकजुट हो सकते हैं, हम अपने मुद्दों को लेकर आगे बढ़ेंगे।

बड़ी संख्या में बदलाव की उम्मीद

टिपरा मोथा के उदय के साथ करीब 20 आदिवासी सीटों में से बड़ी संख्या में बदलाव होने की उम्मीद की जा रही है, जबकि मैदानी इलाकों में जहां ज्यादातर गैर आदिवासी रहते हैं, वहां सत्ता विरोधी लहर और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सत्ताधारी दल के सीटों की गिनती में सेंध लग सकता है। बीजेपी ने 2018 ईसवी के चुनाव में 43.59% मत हासिल किया था जबकि कांग्रेस को केवल 2 फ़ीसदी वोट ही प्राप्त हुए थे।

खरीद फरोख्त से इंकार नहीं

विजॉय हरंगखाल ने कहा कि चुनाव से पहले गठबंधन का प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ हम गुवाहाटी में मिले थे हमें असम के मुख्यमंत्री (हेमंत विश्व शर्मा) ने आमंत्रित किया था। दिल्ली से बीजेपी के दो और बड़े नेता भी आए थे। हमने उन्हें मना कर दिया ,क्योंकि उन्होंने कहा कि हम अलग टिपरालैंड की मांग पर सहमत नहीं हो सकते हैं। पूर्व विद्रोही नेता ने यह भी कहा कि वह खरीद-फरोख्त की आशंका से भी इंकार नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हो सकते हैं जो इस मौके पर अपना मन बदल लें, हम इसके इनकार नहीं कर सकते हैं।

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