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सीमांचल के बैंक खातों में पाकिस्तान-बांग्लादेश के आतंकी कर रहे फंडिंग, सीएससी सेंटरों के बड़े खेल का हुआ खुलासा

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बिहार के सीमांचल में फिर एकबार पाकिस्तान और बांग्लादेश से आतंकी फंडिंग की शंका गहरायी है।कटिहार जिले के आबादपुर में कॉमन सर्विस सेंटर की आड़ में गांव के भोले-भाले लोगों के कागजातों का गलत इस्तेमाल करके बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों के एटीएम को अपने पास रखकर बंगाल के साइबर ठगों को बेचा जाता था। जब इसकी सूचना कटिहार के एसपी को मिली तो छापेमारी की गयी,जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं। गिरोह के तार पश्चिम बंगाल तक मिले।साथ ही पुलिस इसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान कनेक्शन भी खोज चुकी है।इन खातों का उपयोग साइबर ठगी के साथ -साथ, आतंकी फंडिंग और हवाला के रूप में भी होता था ।

आबादपुर में कॉमन सर्विस सेंटर में गांव के सीधे-साधे लोग जब अपना खाता खुलवाने जाते थे या फोटो कॉपी कराने, आधार कार्ड बनाने, पैन कार्ड बनाने जैसे काम कराने जाते थे तो इनके कागजातों की कॉपी ये कॉमन सर्विस सेंटर वाले अपने पास रख लेते थे। उसके बाद उन कागजातों के आधार पर बैंकों में खाते खुलवाते और उसके एटीएम भी अपने पास रख लेते थे।इन खातों को बंगाल के साइबर ठगों के हाथों बेच दिया जाता था.

पुलिस ने जब बूढ़ा कामत, बेलवा, नामक ग्राम संकोला गांव में छापेमारी की तो मुन्ना आलम, छोटन राय और आलम को गिरफ्तार किया ।तीनों आबादपुर थाना क्षेत्र के ही निवासी हैं।इनके पास से 57 एटीएम कार्ड, विभिन्न बैंक के 117 पासबुक, 83 आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।

साइबर थानाध्यक्ष सह पुलिस उपाधीक्षक सद्दाम हुसैन ने पूरे मामले का खुलासा किया और बताया कि आबादपुर थाना क्षेत्र के तीन सीएससी सेंटर में छापेमारी कर तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है।बताया गया कि ये साइबर ठग लोगों का फर्जी तरीके से खाते खुलवा देते थे। इसके लिए वो उनके कागजात और थंब इंप्रेशन वगैरह लेते थे और बैंक खाता खोलने में इसकी मदद लेते थे। बंगाल के साइबर अपराधी मोईन मियां को हर एक खाता 10 हजार में बेचा जाता था। फोन नंबर उसी आधार कार्ड के आधार पर सिम कार्ड निकाल कर बैंक खाते से लिंक कर देता था,जिस वजह से जिनके नाम से खाता खुलता था उन्हें कोई भनक तक नहीं लगती थी।

बंगाल में खाते की बिक्री किए जाने की बात सामने आ चुकी है।अब पुलिस इस जांच में जुटी है कि बांग्लादेश या फिर पाकिस्तान आदि देशों का तो इसमें कनेक्शन नहीं है।पुलिस उपाधीक्षक कहते हैं कि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि ऐसे खातों से आतंकी फंडिंग या फिर हवाला का कारोबार काफी आसानी से हो सकता है।यहां तक की पाकिस्तान एवं बांग्लादेशी आतंकी फंडिंग के लिए ऐसे ही खातों का उपयोग आसानी से किया जा सकता है ताकि आसानी से फंडिंग कर देश में आतंकी गतिविधि को पसारा जा सके।

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