किसान संगठन और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा ,किसानों ने किया दिल्ली के लिए कूच

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न्यूज़ डेस्क 
किसान संगठनों के साथ चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अर्जुन मुंडा के साथ हुई 5 घंटे की बैठक बेनतीजा रही है। किसानों ने अब सरकार से बात बनने के बाद दिल्ली कूच की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा 16 फरवरी को किसानों ने भारत बंद भी बुलाया है।

 दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, आज के ‘दिल्ली चलो मार्च’ में करीब 20 हजार किसान 2500 ट्रैक्टर्स से दिल्ली पहुंच सकते हैं। हरियाणा और पंजाब के कई बॉर्डर एरिया में प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। यह प्रदर्शनकारी दिल्ली में दाखिल होने के लिए तैयार हैं।

 किसानों को दिल्ली की सीमा में दाखिल होने से रोकने क लिए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। तीनों सीमाएं, सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर को पूरी तरह से पुलिस ने सील कर दिया है। ड्रोन से बॉर्डर की निगरानी की जा रही है। पूरी दिल्ली में धारा 144 लागू है। 12 फरवरी से 12 मार्च तक धारा 144 लागू रहेगी। इस दौरान लोगों के इकट्ठा होने, रैलियां करने और लोगों को लाने-ले जाने वाली ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर रोक रहेगी।

 सभी फसलों की खरीद पर एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाएं। डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर सभी फसलों के उत्पादन की औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा एमएसपी मिले।गत्ते का एफआरपी और एसएपी स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के मुताबिक दिया जाए।किसानों-मजदूरों का पूरा कर्ज माफ हो।

पिछले दिल्ली आंदोलन की अधूरी मांगें भी शामिल है। जैसे-लखीमपुर खीरी हत्या मामले में न्याय हो, अजय मिश्रा को कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए और गिरफ्तार किया जाए। आशीष मिश्रा की जमानत रद्द की जाए। सभी आरोपियों से उचित तरीके से निपटा जाए।

बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में देने वाले बिजली संशोधन विधेयक पर दिल्ली किसान मोर्चा के दौरान सहमति बनी थी कि इसे उपभोक्ता को विश्वास में लिए बिना लागू नहीं किया जाएगा, जो कि अभी अध्यादेशों के माध्यम से पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है। इसे निरस्त किया जाए।

इसके साथ ही घायलों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।दिल्ली मोर्चा समेत देशभर में सभी आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे रद्द किए जाएं।आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों और मजदूरों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और नौकरी दी जाए।दिल्ली में किसान मोर्चा के शहादत स्मारक के लिए जगह दी जाए।कृषि क्षेत्र को वादे के अनुसार प्रदूषण कानून से बाहर रखा जाना चाहिए। किसानों ने इन मांगो  को भी उठाया है। 

इसके साथ ही भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर किए जा। कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस आदि पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाना चाहिए। विदेशों से और प्राथमिकता के आधार पर भारतीय किसानों की फसलों की खरीद करें।

किसानो की अन्य मांगो में शामिल है – मनरेगा के तहत हार सला 200 दिनों के लिए रोजगार उपलब्ध कराया जाए। मजदूरी बढ़ाकर 700 प्रति दिन की जाए और इसमें कृषि को शामिल किया जाए।कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास समेत सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार करना और नकती और घटिया उत्पादों का निर्माण और बिक्री करने वाली कंपनियों पर अनुकरणीय दंड और दंड लगाकर लाइसेंस रद्द करना।

इसके साथ ही किसानो की यह भी मांग है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार द्वारा स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना। किसानों और 58 वर्ष से अधिक उम्र के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10,000 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जानी चाहिए। भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाए।

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