कोटा में बढ़ रही खुदकुशी की घटनाएं, कहीं आपका बच्चा भी तो संकट में नहीं!

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बीरेंद्र कुमार झा

आईआईटी और नीट की तैयारी के लिए मशहूर राजस्थान के कोटा शहर में इस साल अब तक 24 छात्र जान दे चुके हैं।छात्रों द्वारा आत्महत्या का यह मामला 8 साल में सबसे ज्यादा है। बीते हफ्ते हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों में एंटी सुसाइड फैन लगाने के आदेश के बावजूद रविवार को चार घंटे में दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी।पहले माना जा रहा था कि एंटी सुसाइड फैन लगाने की अनिवार्यता वाले इस फैसले से आत्महत्या के मामले में कमी आएगी, पर ऐसा होता दिख नहीं रहा है।

सपना लेकर गया बिहार का बेटा खुदकुशी की खबर बनकर रह गया

इस महीने की शुरुआत में खुदकुशी करने वाला भार्गव बिहार के पूर्वी चंपारण से इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा गया था। कभी खत्म ना हो सकने वाले अफसोस के साथ पिता जितेंद्र मिश्र कहते हैं कि शायद वह दबाव में था। उसने अपनी मां से कहा था कि उसका मन नहीं लग रहा है। मैंने उसे घर आने के लिए कहा था,लेकिन उसने मना कर दिया। एक दिन जितेंद्र मोबाइल पर किसी छात्र की खुदकुशी की खबर देख रहे थे, उन्हें शंका हुई तो भार्गव का फोन मिलाया तो दूसरी तरफ से कहा गया कि भार्गव अब नहीं रहा।

पिता से मिलने के बाद फंदे पर लटका यूपी का मनीष

अंकों की प्रतिस्पर्धा कैसे मौत की ओर खींच ले जाती है, मनीष की कहानी इसकी एक बानगी है।17 साल का मनीष यूपी के आजमगढ़ से 6 महीने पहले ही कोटा गया था। वह हॉस्टल में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा था। कोचिंग के पिछले टेस्ट में नंबर कम आए तो पिता 10 अगस्त को उससे मिलने कोटा पहुंचे।लोगों का कहना है की बातों ही बातों में पिता ने बेटा मनीष को डांट लगा दी और गुस्से में हॉस्टल से बाहर निकल गए। 4 घंटे बाद मनीष ने बेडशीट से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी ।

आत्महत्या से पूर्व परिलक्षित होने वाले लक्षण

* कोचिंग जाने के बाद बच्चे की आवाज में बदलाव के संकेत
* कोचिंग के लिए गये बच्चे का बार-बार शिकायत करना।
* कोचिंग जाने के बाद बच्चे की सेहत का खराब होना और हमेशा बीमार रहना।
* कोचिंग गये बच्चे का अभिभावकों के संग फोन पर कम समय तक बात करना और बातचीत से बचाने का प्रयास करना।

खुदकुशी का कारण

* असफलता का डर सताना और भावनात्मक सहाना का न मिलाना।
* नंबर कम आने पर बच्चों को शर्मिंदा किया जाना।
* कोचिंग संस्थानो द्वारा असफलता के लिए बच्चों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाना।* रविवार को भी कक्षाएं संचालित होना या टेस्ट लिया जाना।
* परिवार की आर्थिक स्थिति का खराब होना।

आत्महत्या रोकने के लिए कोचिंग संस्थानों को दिए गए निर्देश

* कोई भी कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापन में दाखिले की गारंटी का दवा नहीं करेगा।
* कोचिंग संस्थान को रविवार के लिए छुट्टी रखनी होगी।
* छुट्टी वाले दिन कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा
* बीच में कोचिंग छोड़ने पर छात्रों का फीस रिफंड करना होगा।
* हर कोचिंग संस्थान को करियर काउंसेलर रखना होगा।
* हर कोचिंग संस्थान और हॉस्टल वालों को अंतिम सुसाइड फैन लगाना होगा।

बच्चों पर न लादें अपनी ख्वाहिश

सर गंगा राम अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर इमरान नूरानी कहते हैं कि हम अपने बच्चों से वह करवाना चाहते हैं, जो हम खुद नहीं कर पाए।हम अपनी इच्छाओं को बच्चों पर लाद कर उनके मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। ऐसे में हर अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को उन्मुक्त वातावरण प्रदान करें और जब तक जरूरी ना हो अनावश्यक उनके क्रियाकलापों में हस्तक्षेप ना करें।

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