पूर्वांचल का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला बस्ती जनपद एक बार फिर से राजनैतिक अखाड़ा बन गया है, आज ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए पूर्वांचल के बाहुबली ब्राह्मण नेता एकजुट होकर मंच पर पहुंचे और योगी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।इस कार्यक्रम का नाम सनातन संवाद नाम दिया गया, जिसका नेतृत्व जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया और योगी सरकार पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाते हुए सनातनियों को एक होकर आने वाले चुनाव में वोट करने की अपील की है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बस्ती के जीआईसी मैदान से योगी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। इतना ही नहीं इस मंच से योगी आदित्यनाथ के धुर विरोधी पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने खुलेमंच से आह्वाहन किया कि ब्राह्मण अब एकजुट हो जाए और अहंकारी व अधर्मी सनातन विरोधी सरकार के खिलाफ फरसा उठा कर सत्ता से इस बार उखाड़ फेंके।
वहीं, पीसीएस अधिकारी रहे अलंकार अग्निहोत्री ने भी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि ब्राह्मण जरूरत पड़ने पर फरसा भी उठा सकता है और अब ब्राह्मण सुदामा नहीं परशुराम है, अलंकार ने हर घर फरसा घर घर फरसा का नारा देकर ब्राह्मणों में जोश भरने का भी काम किया।
वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर काफी गंभीर आरोप लगाए। शंकराचार्य ने कहा कि अगर वर्तमान बीजेपी सरकार गाय और सनातन की बात करती तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता।वहीं गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जब तक पार्टी स्तर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की घोषणा नहीं कर देते तबतक वे भी उनके साथ नहीं हैं।
अविमुक्तेश्वनंद ने कहा कि अगर आने वाले 2027 के चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात नहीं करेगी तो वे खुद अपना कोई आदमी चुनाव मैदान में उतार देंगे। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ पशुओं को मारकर खा लिया गया, और यूपी सरकार इस पर रोक नहीं लगा सकी।उन्होंने कहा कि पहले के मुख्यमंत्री अगर गायों के मांस की बिक्री पर रोक नहीं लगाए तो इस बार योगी सरकार ने भी उस पर क्यों रोक नहीं लगाया, इसका मतलब इनकी इच्छा ही नहीं है कि गाय को कटने से रोका जाए।
योगी आदित्यनाथ पर सवाल खड़ा करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक व्यक्ति दो पद कैसे संभाल सकता है, जब योगी आदित्यनाथ संत है ।वे उत्तर प्रदेश सरकार से वेतन लेकर इस पद का गलत तरीके से निर्वहन कर रहे है। उन्हें चाहिए कि दोनों में से एक पद को छोड़ दे, मगर वे ऐसा नहीं कर रहे और खुद को योगी सन्यासी कहकर दोनों पद लेकर चल रहे जो मर्यादा के अनुकूल नहीं है।
उन्होंने कहा कि कोई भी शंकराचार्य पीएम सीएम या राष्ट्रपति का पद भी नहीं लेना चाहता क्यों कि उसका पद इन सबसे बड़ा होता है, उन्होंने कहा कि कोई भी संत सरकारी अफसर नहीं होना चाहिए।

