मुख्यमंत्री के हर काम में सहयोग नहीं: राज्यपाल सीवी आनंद

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बीरेंद्र कुमार झा

दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच संवैधानिक अधिकारों को लेकर खींचतान अक्सर चर्चा में रहता है।अब यही खींचतान पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच भी देखा जाने लगा है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने कहा कि वह राज्य सरकार के साथ हमेशा सहयोग करेंगे,लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे उनकी हर काम में सहयोग करेंगे। बोस ने साफ कर दिया कि लोकतंत्र में राज्य में सामने रहने वाला चेहरा मुख्यमंत्री का होता है, मनोनीत राज्यपाल का नहीं, लेकिन हर एक को अपनी-अपनी लक्ष्मण रेखा के संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में रहना होता है।

लक्ष्मण रेखा का सम्मान जरूरी

राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि प्रत्येक को अपने दायरे में रहकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।हर किसी की एक लक्ष्मण रेखा है। इस लक्ष्मण रेखा को पार ना करें, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी दूसरे के लिए लक्ष्मण रेखा खींचने की कोशिश ना करें,यही सरकारी संघवाद की भावना है।

निर्वाचित सरकार से पंगा न लें राज्यपाल

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया था कि राज्यपाल बोस संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं,और वह उनकी और असंवैधानिक गतिविधियों का समर्थन नहीं करतीं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल का जिक्र करते हुए कहा था कि वे निर्वाचित सरकार के साथ पंगा नहीं लें। मैं पद का सम्मान करती हूं, लेकिन एक व्यक्ति के तौर पर उनका सम्मान नहीं कर सकती, क्योंकि वह संविधान का अपमान करते हैं। वह अपने मित्रों को विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय की नियुक्ति में सरकार से परामर्श जरूरी,सहमति नहीं

राज्यपाल बोस ने कहा कि विश्वविद्यालय संबंधी कानूनों में यह नहीं कहा गया है कि कुलपतियों को आवश्यक रूप से शिक्षाविद ही होना चाहिए। बोस ने कहा कि उन्होंने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और एक सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी को उनकी योग्यता के कारण कार्यवाहक कुलपति के रूप में नियुक्त किया है और किसी को भी अंतरिम कुलपति के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

राज्यपाल व आनंद बस ने कहा कि कोलकाता उच्च न्यायालय ने कहा है कि कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल को सरकार से परामर्श लेने की आवश्यकता है, लेकिन उसने यह भी कहा है उन्हें( राज्यपाल) को कुलपतियों की नियुक्ति करते समय राज्य सरकार की सहमति की जरूरत नहीं है।

राज्य को बड़ा शैक्षणिक केंद्र बनाने की जरूरत

बोस ने कहा कि प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय एवं आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) और आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में शीर्ष शैक्षणिक पदों पर पश्चिम बंगाल के कई ऐसे लोग हैं, जिनकी राज्य को सेवा करने में रुचि है। हम गौर करेंगे कि हम राज्य को एक बड़ा शैक्षणिक केंद्र कैसे बना सकते हैं।

विश्वविद्यालय की सुचिता जरूरी

उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा की घटनाओं के अलावा यादवपुर विश्वविद्यालय के एक छात्र की कथित तौर पर रैगिंग के कारण हुई मौत के हालिया मामले की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहां की हमारे विश्वविद्यालय का अत्यधिक राजनीतिकरण हो गया है।राजनीतिक दलों के लिए विश्वविद्यालय को नियंत्रित करने की इच्छा रखना स्वाभाविक है,लेकिन हमें हमारी शैक्षणिक प्रणाली की सुचिता बनाए रखने की जरूरत है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ कहा कि कोई भी पार्टी नहीं चाहेगी कि विश्वविद्यालय पर किसी अन्य पार्टी का नियंत्रण हो, लेकिन मेरा मानना है कि वह विश्वविद्यालय के लिए वास्तविक स्वायत्तता पर भी आपत्ति नहीं जताएंगे। बोस ने कहा कि विश्वविद्यालय भी गुंडागर्दी के शिकार हैं क्योंकि बाहरी लोग परिसर में लाए गए हैं,इसलिए बाहरी तत्वों की मौजूदगी पर नजर रखने की आवश्यकता है।

बोस ने कहा विश्वविद्यालय छात्रों का है। इनके परिषर नई पीढ़ी के लिए है। विश्वविद्यालय के प्रत्येक शिक्षक, प्रत्येक पदाधिकारी को यह अहसास होना चाहिए कि उनका पहला कर्तव्य छात्र के प्रति, दूसरा कर्तव्य छात्र के प्रति और तीसरा कर्तव्य भी छात्र के प्रति ही है।

 

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