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Lalu Yadav से कैबिनेट विस्तार का विवाद सुलझाने गए थे Rahul, बिहार सरकार में दो मंत्री पद की मांग पर अड़ी है कांग्रेस

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विकास कुमार
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहली बड़ी मुलाकात आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से की। मीसा भारती के सरकारी आवास पर राहुल गांधी ने लालू यादव को गले लगा लिया। इस मुलाकात के दौरान केसी वेणुगोपाल और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह मौजूद रहे वहीं मीसा भारती के आवास पर तेजस्वी यादव और अब्दुल बारी सिद्दीकी पहले से मौजूद थे। लालू यादव और राहुल गांधी के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद से सियासी अटकलों का बाजार गर्म है। राजनीतिक गलियारों में राहुल और लालू के बीच मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं।

लालू-राहुल के बीच मुलाकात को सीधे बिहार में कैबिनेट विस्तार से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस बिहार में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की मांग कर रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि मुंबई में इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले कैबिनेट विस्तार कराने की है। खुद राहुल गांधी ने भी पटना में विपक्षी मोर्चे की मीटिंग में कैबिनेट विस्तार की मांग उठाई थी। राहुल ने सीधे नीतीश से पूछा था कि कैबिनेट विस्तार कब कर रहे हैं? इस पर नीतीश कुमार हक्के-बक्के रह गए,उन्होंने राहुल को भरोसा दिलाया कि जल्द ही कैबिनेट विस्तार कर लिया जाएगा। लेकिन अभी तक कांग्रेस विधायकों को मंत्री बनने के बुलावे का इंतजार है।

बिहार में कैबिनेट विस्तार पर पेंच फंसा हुआ है,कांग्रेस मंत्री के दो पद से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस का कहना है कि मंत्रिमंडल में आनुपातिक भागीदारी मिले। नीतीश सरकार में मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी औसतन हर 5 विधायक पर एक मंत्री पद। कांग्रेस के पास 19 विधायक हैं और पार्टी का तर्क है कि उसे कम से कम 4 मंत्री का पद मिलना चाहिए। जबकि आरजेडी मंत्री के तीन पद से ज्यादा देने को तैयार नहीं है। आरजेडी विधानपरिषद की सीट और लेफ्ट पार्टियों की सीट को जोड़कर फॉर्मूला तैयार कर रही है। आरजेडी का कहना है कि लेफ्ट के हिस्से वाले मंत्रीपद कांग्रेस को कैसे दिया जा सकता है?

सरकार में बड़े विभागों पर भी कांग्रेस दावा कर रही है। कांग्रेस विभाग बंटवारे में भी उचित हिस्सेदारी की मांग कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 2015 के फॉर्मूले के तहत विभागों का बंटवारा चाह रही है। 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने पर कांग्रेस को शिक्षा, राजस्व और आबकारी जैसे मलाईदार विभाग मिले थे। जबकि 2022 में कांग्रेस के हिस्से मत्स्य कल्याण और पंचायती राज जैसे छोटे विभाग आए हैं। अब कांग्रेस नेताओं की नजर राजस्व, शिक्षा या ग्रामीण कार्य विभाग पर है। यह तीनों विभाग वर्तमान में आरजेडी के पास है। कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का पद भी आरजेडी-जेडीयू ने आपस में बांट लिया है। लगता है इन मुद्दों का ही हल निकालने के लिए राहुल गांधी ने लालू यादव से मुलाकात की है। वक्त ही बताएगा कि कांग्रेस की मनोकामना कब पूरी होगी।

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