Homeदेशझारखंड में ED और मुख्यमंत्री के बीच शक्ति परीक्षण

झारखंड में ED और मुख्यमंत्री के बीच शक्ति परीक्षण

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रांची (बीरेंद्र कुमार): अवैध खनन मामले को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी में एक मामला चल रहा है। इस मामले को लेकर ईडी ने समन भेजकर हेमंत सोरेन को पहले 3 नवंबर को रांची स्थित अपने कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया था। ईडी के समन के बावजूद हेमंत सोरेन 3 नवंबर को ईडी के कार्यालय में नहीं गए और समय मांगते हुए चुनौती भी दे डाली कि समन क्या भेजते हो सबूत है तो गिरफ्तार करो।

एक बार फिर से ईडी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच हो सकता है टकराव

समन के बावजूद 3 नवंबर को हेमंत सोरेन के रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने और एक दूत के द्वारा एक लिफाफा भिजवा दिए जाने के बाद ईडी ने हेमंत सोरेन को दूसरा समन भेजकर 17 नवंबर को रांची स्थित अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। लेकिन हेमंत सोरेन अब 17 नवंबर की जगह ईडी को 16 नवंबर को ही पूछताछ कर लेने की बात कर रहे हैं। हालांकि ईडी इस बार हेमंत सोरेन को इस मामले में कोई रियायत नहीं देना चाहती है। यही कारण है की उसने हेमंत सोरेन के एक दिन पहले यानी 16 नवंबर को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और पूर्व निर्धारित 17 नवंबर को ही हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए अड़ी हुई है।

ईडी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मे किसकी की स्थिति कितनी मजबूत

3 नवंबर को ईडी के समन के बावजूद हेमंत सोरेन ईडी कार्यालय में उपस्थित ना हो कर अपने दूत के द्वारा एक लिफाफा ईडी को भिजवा कर आराम से रायपुर के लिए निकल गए तब उनकी स्थिति मजबूत थी, क्योंकि वह झारखंड के मुख्यमंत्री हैं और उनके कार्यक्रम पूर्व निर्धारित होते हैं। तब ईडी ने समन भेजने से पूर्व इस बात का ध्यान नहीं रखा था।

इसी बात का उल्लेख हेमंत सोरेन ने लिफाफे में किया था कि 15 नवंबर तक उनके कार्यक्रम पूर्व निर्धारित है, साथ ही उन्हें विधि विशेषज्ञों से भी बात करनी है। ईडी ने इन्हें दुबारा समन भेजते समय इस बात पर ध्यान दिया और उन्हें 17 नवंबर को रांची स्थित अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया। हेमंत सोरेन 17 नवंबर की जगह 16 नवंबर को ही पूछताछ के लिए ई डी कार्यालय में उपस्थित करने की बात कर रहे हैं तब यहां ई डी की स्थिति मजबूत नजर आती है क्योंकि ईडी भी एक संवैधानिक संस्था है और इसके भी समय की प्रतिबद्धता होती साथ ही इसने पूर्व में हेमंत सोरेन की भावनाओं का कद्र किया और दुबारा समन भेजकर उनके द्वारा दिए गए समय के सीमा की समाप्ति के बाद 17 नवंबर का समय दिया।

अब हेमंत सोरेन इसमें बदलाव की बात करते हैं तो वे एक प्रकार से ईडी को नीचा दिखाने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रयास वे पहले भी कर चुके हैं जब 3 नवंबर को उन्हें ईडी कार्यालय में उपस्थित होना था तो 2 नवंबर को उन्होंने अपने यूपीए के विधायकों के साथ विचार किया था और इस मामले को लेकर सड़क से सदन तक आंदोलन चलाने की बात कही थी। फिर 3 नवंबर को भी ईडी कार्यालय जाने की जगह उन्होंने रांची में जेएमएम समर्थकों के साथ सभा की और उसमें उत्तेजक भाषण देते हुए ईडी को चुनौती दी थी कि सबूत है तो गिरफ्तार करो समन क्या भेजते हो ?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ईडी के बीच इस प्रकार की तानातनी और एक दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास आगे क्या रुख अख्तियार करेगा इसका पता दो दिनों में चल जायेगा,लेकिन अगर इस बार भी दोनों के बीच टकराव हुआ तो यह देश के लिए ठीक नहीं होगा क्योंकि इससे अलग अलग संवैधानिक संस्था को सम्मान देने की जगह कटुता बढ़ेगी और उनके कर्तव्यों के निर्वहन में परेशानी होगी।

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