राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू दे रही थी भाषण और बिजली हो गई गुल, 9 मिनट तक हॉल में छाया अंधेरा

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बीरेंद्र कुमार झा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाषण के दौरान ही बिजली गुल हो गई और पूरा हाल अंधेरे में डूब गया। मामला उड़ीसा के मयूरभंज के बारीपदा का है। शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां स्थित महाराजा श्री राम चंद्र भंज देव विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स और फैकल्टी को जैसे ही संबोधित करना शुरू किया, बिजली गुल हो गई और हाल करीब 9 मिनट तक अंधेरे में डूबा रहा।

11:56 से 12:05 बजे तक छाया रहा अंधेरा

बिजली गुल होने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बेहद शालीन लहजे में नाराजगी भी जाहिर कर दी उन्होंने बाद में अपना भाषण जारी रखते हुए कहा कि या विश्वविद्यालय जितना खूबसूरत है उतना ही अंधेरे में भी है गौरतलब है कि सुबह 11:56 से लेकर 12:05 बजे के बीच बिजली गुल रही। उड़ीसा सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने भी इसकी पुष्टि की है।

टाटा पावर ने कहा-यह यूनिवर्सिटी की आंतरिक समस्या

राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान इस तरह से बिजली गुल हो जाने के सवाल पर टाटा पावर नॉर्थ उड़ीसा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPNODL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भास्कर सरकार ने बताया कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में बिजली जाना विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला है। टाटा पावर का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह बिजली विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम के इंटरनल सर्किट में फॉल्ट की वजह से गई थी।

वाइस चांसलर ने जांच कराने की बात की

राष्ट्रपति के कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान इस प्रकार बिजली चले जाने के मुद्दे को विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर संतोष त्रिपाठी ने काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए कहा कि आईटीसीओ ने इस भवन का निर्माण किया था और जनरेटर की रिपेयरिंग भी उसने ही की थी।हमारे पास एक जेनरेटर है लेकिनजब बिजली कटी उस वक्त हमरा यह जनरेटर भी नहीं चल पाया। हम इस मामले की जांच कराएंगे।

मेरी नजर में यह राष्ट्रपति तापमान : प्रदीप कुमार

राष्ट्रपति के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बिजली का इस प्रकार चला जाना वहां उपस्थित स्कॉलरो को भी काफी खल गया। प्रदीप कुमार नंदा नामके एक स्कॉलर ने जिन्हें आज राष्ट्रपति ने डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की, उन्होंने इस घटना को राष्ट्रपति का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि करीब 10 मिनट तक ऑडिटोरियम में अंधेरा छाया रहा। हालांकि राष्ट्रपति ने इसे अन्यथा नहीं लिया लेकिन उड़ीसा के लिए शर्म की बात है।

 

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