बिहार में आज दो मंचों पर सियासी लड़ाई ,रैली से पहले शाह पर तेजस्वी ने साधा निशाना

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अखिलेश अखिल
बिहार में आज अमित शाह और नीतीश कुमार आमने -सामने हैं। चम्पारण के वाल्मीकि नगर में बीजेपी की विशाल रैली है तो पूर्णिया में जदयू की महारैली। पूर्णिया में महागठबंधन का जुटान है। सीमांचल के पांच सीटों पर महागठबंधन की नजर है। पिछले चुनाव में दो सीट जदयू को मिली थी जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। दो सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी। लेकिन अब जब नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो गए हैं और अगले चुनाव में बीजेपी को धूल चाटने का इलाज कर चुके हैं ऐसे में पूर्णिया की यह रैली काफी अहम मानी जा रही है। उधर अमित शाह चम्पारण को साधने आज वाल्मीकि नगर पहुँच रहे हैं। वहाँ एक रैली को सम्बोधित करेंगे। शाह आज नीतीश कुमार पर शब्दवाण चलाएंगे तो नीतीश और तेजस्वी बीजेपी का पोल खोलेंगे। बिहार की जनता यह सब समझ कर हतप्रभ है।

आज इन दोनों रैली से पहले ही तेजस्वी ने बीजेपी पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि अमित शाह आज यहां पर आ रहे हैं तो वो बताएं कि उन्होंने बजट में बिहार क्यों ठगा और बजट से बिहार को क्या मिला? आपने सिर्फ ठगने का काम किया है, बिहार के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। जनता मन बना चुकी है कि 2024 में इनको सबक सिखाएगी।

बता दें कि इससे पहले अमित शाह जब बिहार के दौरे पर आए थे तो डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि गृह मंत्री काम की नहीं बेकार की बातें करने बिहार आए थे। अमित शाह को बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को विशेष पैकेज देने का वादा किया था। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और नौकरी देने की बात करनी चाहिए थी। केंद्र सरकार ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने की बात की थी। अमित शाह ने इस मामले में 8 साल का हिसाब क्यों नहीं दिया। बीजेपी वाले जनता को ठगने के लिए आते हैं।

ये सब बाते तो रैली के पहले के हैं। असली खेल तो रैली के दौरान होने हैं। अमित शाह के साथ बीजेपी की पूरी फ़ौज तैयार है। चंपारण में बीजेपी की ज्यादा पकड़ है। बीजेपी की इस रैली में बड़ी संख्या में कई जिलों के लोग शामिल हो रहे हैं। रात भर गाड़ियों से जनता वाल्मीकि नगर पहुँचती रही। उधर पूर्णिया में आज सीमांचल की जनता का जुटान है। नीतीश कुमार किसी भी सूरत में सीमांचल से एक भी सीट बीजेपी को जाने देना नहीं चाहते। ऐसी हालत में बीजेपी की चुनौती ज्यादा ही बढ़ी है।

बिहार के लोग कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव एक साल बाद होने हैं लेकिन जिस तरह से अभी से ही चुनावी दुदुम्भी बज रही है उससे विकास के कामो पर असर पडेगा। लेकिन जनता की आवाज को कौन सुनता है ? देखने की बात यह है कि शाह और नीतीश के बीच जुबानी भिड़ंत कैसी होती है। कौन किसके बारे में क्या कहता है बिहार की जनता उसका विश्लेषण बाद में जनता ही करेगी।

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