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तीन दिवसीय भारत दौरे पर नेपाल के प्रधानमंत्री, भारत के लिए महत्वपूर्ण है प्रधानमंत्री प्रचंड का यह दौरा

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बीरेंद्र कुमार झा

नेपाल के प्रधानमंत्री कमल दहल प्रचंड आज से 3 दिनों की अधिकारिक भारत दौरे पर हैं। प्रचंड के साथ उनका एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। प्रचंड का यह भारत दौरा कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है। खास तौर पर चीन के साथ कूटनीतिक संबंध और नेपाल चीन के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच हो रहे इस दौरे का महत्व कहीं अधिक हो जाता है।

चीन के निमंत्रण के बावजूद नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने भारत को चुना

पिछले साल दिसंबर में तीसरी बार प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड का यह पहला विदेश यात्रा है। गौरतलब है कि नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड ने चीन के निमंत्रण के बावजूद अपने पहले विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना है। इस यात्रा को लेकर भारत और नेपाल दोनों ही पक्षों में काफी उत्साह और उत्सुकता है। खासकर बीते कुछ सालों से जिस तरह नेपाल लगातार चीन से करीब होता जा रहा था, ऐसे में उनकी यह भारत यात्रा नए सिरे से संबंधों में गर्माहट लाएगी।प्रचंड सदियों पुराने बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं से वार्ता करेंगे इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर मुहर लगेगी।

प्रचंड का तीसरा भारत दौरा

नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड अपने पहले के कार्यकाल के दौरान भारत का दौरा कर चुके हैं।कमल दहल एक 68 वर्षीय पूर्व माओवादी विद्रोही नेता है, जो प्रचंड के नाम से जाने जाते हैं।भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह दौरा हमारे नेबर हुड फर्स्ट नीति को आगे बढ़ाने के लिए भारत और नेपाल के बीच नियमित रूप से उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा को जारी रखता है।सहयोग के सभी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध काफी मजबूत हुए हैं।

कई मायनों में प्रचंड का यह दौरा है महत्वपूर्ण

बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए प्नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं से वार्ता करेंगे। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि यह यात्रा नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने बहुमुखी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और मजबूत करेगी। द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और व्यापार, ऊर्जा, कृषि, संस्कृति तथा हवाई सेवा से जुड़ी चर्चा भारतीय नेताओं के साथ उनकी बातचीत में प्रमुखता से शामिल होगी।

 

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