पटना (वीरेंद्र कुमार झा) : केंद्र सरकार में मंत्री बनने की बात हो चाहे राज्य की सरकार में मुख्यमंत्री बनने की बात , नीतीश कुमार कभी भी अपनी खुद की पार्टी के बल पर ऐसा नहीं कर पाए। केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री बनने का उनका ख्वाब तभी पूरा हुआ जब उन्होंने किसी न किसी पार्टी से गठबंधन किया। उनका गठबंधन मैनेजमेंट गजब का है। नीतीश कुमार परस्पर विपरीत स्वभाव वाले राजनीतिक दलों से भी बार-बार नाता तोड़ने और जोड़ने की कला में माहिर हैं। ऐसे में समस्तीपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज के उद्घाटन समारोह के समय नीतीश कुमार का दिया गया वक्तव्य की अब वे जीवनभर कभी उन लोगों यानी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, यह उनका अंतिम सत्य है या फिर पूर्व की तरह चली गई किसी चाल का हिस्सा है ।
पूर्व में भी इस तरह का वक्तव्य देकर मुकर चुके हैं नीतीश
नीतीश कुमार का एक राजनीतिक दल से गठबंधन तोड़कर दूसरे दल से गठबंधन कर सरकार बनाकर मुख्यमंत्री बनने की कोई पहली घटना नहीं है,नीतीश कुमार मौका देखकर हमेशा पाला बदलते रहते हैं।
नीतीश कुमार ने पहली बार 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी , तब इन्हें बीजेपी का बैकअप प्राप्त था लेकिन इसके बावजूद दोनों मिलकर भी महागठबंधन के रूप में आरजेडी को सरकार बनाने से नहीं रोक सके। इसके बाद नीतीश कुमार को इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन इस्तीफा देकर भी वे चुप नहीं बैठे केंद्र की अटल सरकार में मंत्री पद ले लिया। फिर 2005 में नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर बिहार विधान सभा का चुनाव लड़ा और चुनाव में बहुमत प्राप्त कर अपने मुख्यमंत्रित्व में एनडीए गठबंधन वाली सरकार बनाई। तब से लेकर 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को बहुमत मिलने पर जीतन राम मांझी को कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री बनाने के अलावा अबतक नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। लेकिन इस दौरान उनके गठबंधन के पार्टनर बदलते रहे।
जिस बीजेपी के साथ गंठबंधन कर मुख्यमंत्री बनाने की शुरुआत की थी 2013 में उसके द्वारा नरेंद्र मोदी को अपने चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बना दिए जाने से वे इतने बड़े आहत हुए कि यह कहते हुए बीजेपी से नाता तोड लिया कि हम राज्य मैं संशय की स्थिति को खत्म करना चाहते थे और हमारी सरकार अच्छी चल रही थी लेकिन हाल के दिनों में हालात इतने बिगड़ गई की अब इस गठबंधन को आगे नहीं चलाया जा सकता है। लेकिन इस तरह बीजेपी से ब्रेकअप से पहले ही नीतीश ने आरजेडी के साथ नया गठबंधन कर लिया था
लिहाजा इस नए महागठबन्धन की सरकार में भी वे ही मुख्यमंत्री बने। बाकी कार्यकाल पूरा करने के बाद 2015 का विधानसभा का चुनाव नीतीश कुमार ने आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ ही लड़ा और जीतने पर अपने मुख्यमंत्री में सरकार बनाई। लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे आरजेडी वाले महागठबंधन से भी नीतीश कुमार का मोहभंग होने लगा और 2018 में नीतीश कुमार इस महागठबंधन से भी यह कहते हुए अलग हो गए कि अब इनके साथ चलना संभव नहीं है क्योंकि ये आरजेडी वाले खासकर तेजस्वी भ्रष्टाचार में लिप्त रहते है।
2020 में नीतीश ने बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा विधानसभा चुनाव
इस बीच नीतीश कुमार ने फिर उसी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली जिसे 2013 में इन्होंने छोड़ दिया था। विधानसभा की बाकी समयावधि को पूरा कर 2020 का चुनाव नीतीश कुमार ने बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ ही लड़ा और जीतने के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के तहत सरकार बनाकर खुद मुख्यमंत्री बन गए। एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री वाली यह सरकार 2022 के अगस्त महीने में एक बार फिर टूट गई और जिस आरजेडी को नीतिश कुमार ने पहले ठुकराया था उसी के साथ मिलकर सरकार बना ली और उसके मुख्यमंत्री बन गए।
नीतीश कुमार का इस बार का गंठबंधन टिकाऊ होगी इसे नीतीश कुमार के गठबंधन के ट्रेंड्स को देखते हुए तो नहीं माना जा सकता है, लेकिन जब नीतीश कुमार समस्तीपुर में लोगों की सभा में इस बात का एलान कर दिया कि अब वे जीवन भर बीजेपी के साथ नहीं जायेंगे।। तो हमें इसे मानने में फिलहाल आपत्ति कैसी!

