Homeदेशबिहार में मंत्रिमंडल विस्तार में फंसा पेंच

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार में फंसा पेंच

Published on

  • बीरेंद्र कुमार झा

मुख्यमंत्री ने तेजस्वी के पाले में डाली गेंद

बिहार में महागठबंधन की सरकार की कैबिनेट विस्तार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब गेंद उप मुख्यमंत्री (Deputy Cheif minister) तेजस्वी यादव के पाले में डाल दी है।मुख्यमंत्री ने बिहार में कैबिनेट विस्तार के सवाल पर पत्रकारों से कहा कि आप लोग कैबिनेट विस्तार की बात उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से पूछ लीजिए। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार में कोई भी निर्णय मुख्य घटक दल आरजेडी और कांग्रेस की बातचीत के फैसलों के बाद ही होगा।

कांग्रेस ने दो मंत्रियों की रखी है मांग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि गठबंधन (coalition) सरकार में किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे ,यह तय है। आगे आरजेडी और कांग्रेस के लोग आपस में बात कर लेंगे। हम लोग इंतजार ही कर रहे हैं, वे लोग जो तय करेंगे उस पर विचार किया जाएगा। हमसे भी कांग्रेस के लोगों ने मिलकर कहा था तो हमने कहा था कि आप उपमुख्यमंत्री से बात कर लीजिए। गौरतलब है कि कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस ने दो और मंत्रियों को शामिल करने की मांग रखी है, जबकि आरजेडी कोटे से दो मंत्रियों के हटने की स्थिति के बाद आरजेडी कोटे से दो और मंत्री बनाए जाने की संभावना है।

मंत्रिमंडल विस्तार का काम मुख्यमंत्री को करना है

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि सरकार के मुखिया नीतीश कुमार हैं ।मंत्रिमंडल विस्तार का निर्णय भी उन्हें ही करना है। मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपनी अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद मधुबनी की समाधान यात्रा में मंत्रिमंडल विस्तार करने की बात की है। समाधान यात्रा के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होना है।

संवैधानिक प्रावधान

संवैधानिक दृष्टिकोण से देखें तो राज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ दिलाते हैं। लेकिन राज्यपाल उन्हीं लोगों को मंत्री पद का शपथ दिलाते हैं जिसके नाम की संस्तुति मुख्यमंत्री के द्वारा की जाती है। यह बात दिगर है की गठबंधन की मजबूरी मुख्यमंत्री को अपने स्वविवेक से अपने मंत्रिमंडल के गठन के कार्य से वंचित कर देता है। मुख्यमंत्री अगर उनकी बात न मानकर अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करना छाएंगे तो सहयोगी दल मुख्यमंत्री को ही मुख्यमंत्री के पद से पदच्युत कर सकता है।

 

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