Homeदेशन लोन होगा सस्ता, न घटेगी EMI, बढ़ेगी मंहगाई!

न लोन होगा सस्ता, न घटेगी EMI, बढ़ेगी मंहगाई!

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न्यूज़ डेस्क 
लोगों को उम्मीद थी कि आरबीआई इस बार लोन को सस्ता कर सकती है साथ कर्जदार लोगों को ईएमआई में भी रहत मिल सकती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार 9वीं बार नीतिगत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5% पर स्थिर रखा। 

जाहिर है लोगों को सस्ते लोन और ईएमआइ कम होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। अब अक्टूबर में RBI एमपीसी की बैठक होगी, इसमें स्थितियां यदि सकारात्मक रही को ब्याज दरें घट सकती हैं। 

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई पर बना रहेगा, क्योंकि यह अभी भी 4% के लक्ष्य से अधिक है। आरबीआई  ने वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को 4.5% पर बरकारर रखा है, साथ ही जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को भी 7.2% पर बरकरार रखा है।

हालांकि, RBI ने वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी और तीसरी तिमाही यानी जुलाई से दिसंबर के बीच महंगाई बढऩे की आशंका जताई है और अपने अनुमानों को संशोधित किया है।

बता दें कि लगातार बढ़ रही खाद्य कीमतों ने आम लोगों की ही नहीं, बल्कि RBI की भी चिंता बढ़ा दी है। शक्तिकांत दास ने कहा कि एमपीसी  ऊंची खाद्य कीमतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती, भले ही मुख्य मुद्रास्फीति कम हो रही हो। उन्होंने कहा कि देश के आम परिवार खाद्य कीमतों से ही ज्यादा प्रभावित होते हैं।

शक्तिकांत दास ने कहा कि मानसून में तेजी आने से खुदरा मुद्रास्फीति में कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। दास ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति अपेक्षा से अधिक रहने के कारण जून में खुदरा महंगाई दर बढक़र 5.1% हो गई।

शक्तिकांत दास ने कहा कि कृषि गतिविधियों में सुधार से ग्रामीण उपभोग की संभावनाएं उज्ज्वल होंगी, जबकि सेवा गतिविधियों में निरंतर उछाल से शहरी उपभोग को समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बैंकों और कॉरपोरेट का स्वस्थ बही-खाता, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर जोर तथा निजी निवेश में तेजी के स्पष्ट संकेत निश्चित निवेश को बढ़ावा देंगे। वैश्विक व्यापार की संभावनाओं में सुधार से बाहरी मांग में मदद मिलने की उम्मीद है।

अमेरिका में मंदी की आशंका से पिछले एक हफ्ते से ग्लोबल शेयर बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है, लेकिन RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एक महीने के डेटा से यह अनुमान लगा लेना कि अमेरिका में मंदी आएगी यह बताना और परिपक्व सोच की निशानी है। RBI गवर्नर ने कहा, अमेरिका में आर्थिक विकास के जो आंकड़े आए हैं उसके स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था बेहतर तरीके से विकास कर रही है। 

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