Homeदेशकांग्रेस अधिवेशन के पहले पार्टी नेताओं पर ईडी  छापे के मायने

कांग्रेस अधिवेशन के पहले पार्टी नेताओं पर ईडी  छापे के मायने

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न्यूज़ डेस्क  
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज सुबह ही कांग्रेस के कई नेताओं के घर ईडी की धमक हुई। पार्टी के कोषाध्यक्ष,पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष के साथ ही कई नेताओं के यहां ईडी की छापेमारी शुरू हो गई। इन नेताओं के एक विधायक भी शामिल है। चार दिन बाद 24 -26 फरवरी तक कांग्रेस का महाधिवेशन इसी रायपुर में होना है, ऐसे में ईडी की यह छापेमारी कई सवालों को भी जन्म दे रहा है। ईडी की इस छापेमारी को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर हमला बोला है।

सीएम भूपेश बघेल ने सोमवार को ट्वीट कर लिखा “छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष, पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष और एक विधायक सहित मेरे कई साथियों के घरों पर आज ईडी ने छापा मारा है। चार दिनों के बाद रायपुर में कांग्रेस का महाधिवेशन है। तैयारियों में लगे साथियों को इस तरह रोककर हमारे हौसले नहीं तोड़े जा सकते। भूपेश बघेल ने आगे कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की सफलता से और अडानी की सच्चाई खुलने से भाजपा हताश है। यह छापा ध्यान भटकाने का प्रयास है। देश सच जानता है। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

इधर दिल्ली में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि प्रतिशोध की राजनीति और उत्पीड़न की राजनीति की नई मिसाल आज सुबह रायपुर में देखने को मिला है। 24, 25 और 26 फरवरी को कांग्रेस का 85वां अधिवेशन होने वाला है। तीन दिन पहले कांग्रेस के कई नेताओं के घरों पर आज सुबह ईडी के छापे पड़े हैं। आज सुबह 5 बजे से छापे शुरु हुए हैं।

पवन खेड़ा ने कहा कि इस सरकार ने कई परिभाषाएं बदलीं, कई परंपरराएं बदलीं, अब ईडी मंतलब एलिमिनेटिंग डेमोक्रेसी. हैरानी की बात है जब आप आकंड़े देखते हैं तो 2002 से 2014 के बीच जब यूपीए की सरकार थी तो ईडी ने 112 बार छापे मारे थे। पिछले 8 सालों में 3010 छापे ईडी ने मारे हैं। सिर्फ राजनीतिक दलों और राजनेताओं की लिस्ट को आप सामने रखेंगे तो 95 फीसदी छापे विपक्ष पर ईडी ने डाले हैं। राहुल गांधी से जी से 50 घंटे तक ईडी ने पूछताछ की थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “हमारी पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी जी से लगातार ईडी ने तीन दिन तक पूछताछ की थी। हमारे मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी से भी ईडी ने पूछताछ की। और अब छत्तीसगढ़ में आज सुबह से लगातार छापेमारी चल रही है। भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से तो बौखलाए हुए हैं ही प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी। हमारा महाधिवेशन भी वहां होने वाला है। वरिष्ठ नेताओं पर हमारे ट्रेजरार पर, हमारे कुछ विधायकों पर, कुछ निगम के चेयरमैन पर, एक प्रवक्ता पर, इन सबके यहां आज सुबह से ईडी की छापेमारी जारी है।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको पार्टीवार कुछ जानकारी देना चाहता हूं। 2014 से अगर आप शुरू करें तो कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं पर 24 बार ईडी ने छापेमारी की। वहीं, टीएमसी पर 19 बार रेड हुई। एनसीपी पर 11 बार, शिवसेना पर 8 बार रेड हुई, डीएमके पर 6 बार, आरजेडी और बीएसपी पर 5 बार रेड हुई, टीडीपी पर पांच बार, आईएनएलडी पर तीन बार, सीपीएम पर दो बार, एनसीपी पर दो बार, पीडीपी पर दो बार, एआईएडीएमके पर एक बार और एमएनए पर एक बार ईडी की रेड हुई।”
ऐसे में सवाल है कि आखिर मोदी सरकार ऐसा क्यों कर रही है? बता दे कि छतीसगढ़ में भी इसी साल विधान सभा चुनाव होने हैं और बीजेपी किसी भी हाल में यहां चुनाव जीतना चाहती है। बीजेपी की नजर आगामी लोकसभा चुनाव पर है। उसे लगता है कि छत्तीसगढ़ को जीतने के बाद लोकसभा चुनाव में इसके लाभ मिल सकते हैं। बीजेपी का दाव यह है कि कांग्रेस महाधिवेशन से पहले पार्टी नेताओं को बदनाम किया जाए ताकि जनता में उसके खिलाफ माहौल बने। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के यहां छापेमारी से लगता है कि बीजेपी यह मान कर बैठी है कि अधिवेशन से पहले कोषाध्यक्ष के यहां पैसे इकठे होंगे। पकडे जाने पर उन पैसो का हिसाब मांगा जाएगा। बीजेपी इन दिनों अडानी मसले से काफी परेशान है। मोदी सरकार की विदेश के कई मंचो से भी बदनामी हो रही है ऐसे में बीजेपी किसी भी हाल में कांग्रेस को बदनाम करने का खेल करती नजर आ रही है।

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