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चीन के नए नक्शे पर Manish Tiwari ने कसा तंज- 2000KM पर कब्जा करने वाले शी जिनपिंग दिल्ली में, क्या भारत को शोभा देगा?

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न्यूज डेस्क
चालाक चीन ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना हिस्सा बताकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। ये नक्शा ऐसे समय में जारी हुआ है, जब चीन के राष्ट्रपति जी-20 की बैठक के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। चीन के इस विवादित नक्शे का भारत में कांग्रेस के नेताओं ने विरोध किया है। इस संवेदनशील मामले पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को सलाह दी है,कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस मैप को बेतुका बताया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह भी दी है,तिवारी ने कहा कि चीन का दावा बेतुका है और इसकी निरर्थकता चीन-भारत सीमा विवाद के इतिहास से प्रमाणित होती है। आज असल मुद्दा ये है कि चीन ने थियेटर स्तर पर कई प्वाइंट पर एलएसी का उल्लंघन किया है। ऐसे में सरकार को गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि दिल्ली में ऐसे व्यक्ति शी जिनपिंग को बुलाना क्या भारत के स्वाभिमान के अनुरूप होगा,जिसने एलएसी से लगी दो हजार वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है।

मनीष तिवारी ने चीन के नए नक्शे पर भी बयान दिया है,उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा के तीन सेक्टर हैं। एक पूर्वी सेक्टर हैं, जहां मैकमोहन लाइन को 1940 से भारत और चीन के बीच सीमा के रूप में मान्यता मिली हुई है। जब भारत, चीन और तिब्बत के प्रतिनिधियों ने एक संधि पर हस्ताक्षर किया था,जहां तक मिडल सेक्टर की बात है, कुछ छोटे-मोटे मुद्दों को छोड़कर दोनों पक्षों में कोई विवाद नहीं है। असल समस्या पश्चिमी सेक्टर पर है, जहां पर बॉर्डर सही तरीके से रेखांकित नहीं है। 1865 में ब्रिटिश सरकार ने पहली बार इस इलाके को रेखांकित करने की कोशिश की। उन्होंने जम्मू कश्मीर राज्य और तिब्बत के बीच सीमा निर्धारण के लिए सर्वे कराया। एक सीमा प्रस्तावित हुई, जिसे जॉनसन-आर्डेग लाइन कहा गया,इसके बाद 1873 फॉरेन ऑफिस लाइन और 1899 में मैकडोनाल्ड लाइन बनी। ये तीनों लाइन ब्रिटिश सरकार ने चीन को भेजी लेकिन चीन ने न तो इसे स्वीकार किया और न ही इनकार किया,यही मुद्दा आगे बढ़ता हुआ 1962 भारत-चीन युद्ध के रूप में सामने आया।

भारत सरकार को चीन की चालाकियों का तगड़ा जवाब देना होगा। अब दिखाना होगा कि मोदी का सीना वाकई छप्पन इंच का है,वरना ऐसा ना हो कि समय हमारे हाथ से फिसल जाए और भारत की जमीन पर धूर्त चीन एक बार फिर से कब्जा जमा ले।

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