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भगवान राम टेंट से महल में पहुंचे, 500 वर्षों का इंतजार 84 सेकेंड में पूरा

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रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे। जैसे राजनीतिक छींटाकसी वाले बयानों से लेकर कोर्ट में कभी राम के अस्तित्व नहीं होने जैसे हलफनामों से लेकर लंबी चली कानूनी दांवपेच जैसी लंबी प्रक्रिया के बाद ,आज लगभग 500 सालों का इंतजार खत्म हुआ।जिस प्रकार अयोध्या के राजा राम को वनवास झेलना पड़ा था उसी प्रकार यहां भी पहले तो अयोध्या स्थित रामलला के मंदिर को बाबर के सैनिकों ने तोड़कर मस्जिद बना दिया और फिर वनवास की तरह ही विभिन्न कारणों से अयोध्या में इनका टेंटवास शुरू हो गया। लेकिन 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने सब कुछ बदल दिया और उसका ही प्रतिफल है कि आज से अब इन सब बातों पर विराम लग गया, क्योंकि रामलला अब टेंट से अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो गए हैं ।मुख्य यजमानके रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कर दी है। अयोध्या ही नहीं आज पूरा देश और देश ही क्या विदेश में भी रह रहे भारतीयों में भक्ति भाव, श्रद्धा और आस्था का ज्वार उमड़ रहा है। लाइव प्रसारण के जरिए लोग इस अभूतपूर्व क्षण से परमानंद की अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं।

84 सेकेंड में संपन्न हुआ प्राण प्रतिष्ठा

अयोध्या के रामलला की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा का कार्य तो 11 दिन पहले से ही प्रारंभ हो गए थे जब से प्रधानमंत्री ने नासिक के मंदिर से विशेष अनुष्ठान शुरू किया था। इधर अयोध्या में यजमान अनिल मिश्रा सपत्नीक अयोध्या में सरयू पूजन से लेकर मूर्ति का गर्भगृह में प्रवेश और इनका विभिन्न अनुष्ठान कर रहे थे।लेकिन भगवान रामलला के मुख्य प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 22 जनवरी को शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ।आज भगवान रामलला के प्राण प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकेंड का ही। इस प्राण प्रतिष्ठा की पूजा के मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र थे। कुर्ता- धोती पहने और माथे पर तिलक लगाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधि विधान से विशिष्ट पंडितो के द्वारा कराये जा रहे मंत्राचारो के बीच भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की। रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनकी प्रतिमा के आंखों पर बंधी प्रतीकात्मक पट्टी को भी खोला गया और रामलाल को आइना में उनकी छवि दिखाया गया।

प्राण प्रतिष्ठा के समय कौन-कौन थे गर्भगृह के अंदर

यों तो राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से देश के प्रसिद्ध राजनीतिक हस्तियों से लेकर खेल,कला उद्यम समेत विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट स्थान रखने वाले महत्वपूर्ण लोगों को इस अवसर पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन इतने सभी लोगों के लिए गर्भ गृह में रहना सिर्फ स्थानाभाव के कारण नहीं, बल्कि पूजा पद्धति की अनिवार्यता को देखते हुए भी संभव नहीं था। ऐसे में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान गर्भगृह में जो लोग थे, उनमें मुख्य यजमान के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ,श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महंत नृत्य गोपाल दास, अनिल मिश्रा और डोम राजा भी मौजूद थे । रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का पूरा आयोजन विधि विधान के साथ पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित और उनके साथ 121 अन्य पुजारी ने कराया।इस प्राण प्रतिष्ठा पूजा के दौरान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर लगातार आकाश से पुष्प वर्षा कर रहे थे। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस दौरान रामलला की उसे पुरानी मूर्ति की भी पूजा की, जिसे पुराने परिसर से निकालकर नए मंदिर में स्थान दिया गया। इस प्रतिमा को गर्भगृह में रविवार रात को ही रखा गया था।।

क्या अब शुरू होगा रामराज्य

हमारे देश के संविधान में भगवान श्री राम की तस्वीर अंकित है।आज अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ हमारे देश के बहुतसंख्यक लोगों के दिलों में अब भगवान राम की तस्वीर आ गई होगी।इस कार्यक्रम के बाद अब यह कहा जा सकता है कि अब इस देश में रामराज आ जाएगा और इसकी एक बड़ी विशेषता यह होगी कि जिस प्रकार से रामराज को लेकर कहा जाता था कि दैहिक, दैविक भौतिक तापा, रामराज्य काहू नहीं व्यापा। अब भारत को रामराज के उस स्वरूप में आना चाहिए।लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अब से आगे भी उच- नीच, जाति – वर्गों और आरोप – प्रत्यारोप और लांछनों की राजनीति कर देश को बांटने का प्रयास करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे या फिर रामराज लाने का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य करेंगे जिससे
इस देश में सही मायने में रामराज आ जाएगा और हर लोग हर प्रकार से सुखी रहेंगे।

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