उम्मीदों का नहीं अंत फिर क्यों समाजवादी पार्टी से ही बात करने लगे जयंत

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बीरेंद्र कुमार झा

जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के बीजेपी संग जाने की अटकलें कुछ दिनों से लग रही थी। इस बीच आरएलडी ने समाजवादी पार्टी से बिगड़े रिश्तों के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर शर्त रख दी है आरएलडी ने समाजवादी पार्टी से मांग की है कि उसे 12 सीटें दी जाए। इसकी वजह यह है कि यदि आरएलडी राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा चाहती है तो उसे कम से कम 6% वोट जुटाने होंगे। इसे उम्मीद है कि वह लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर पाई तो फिर से राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा मिल सकेगा। आरएलडी ने 2019 में 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जीत नहीं पाई थी।

बीजेपी से नहीं बनी बात

पिछले कुछ दिनों से खबर थी कि जयंत चौधरी की बीजेपी के साथ बातचीत चल रही है। इसके बीच उसका समाजवादी पार्टी से 12 सीटों की शर्त रखना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शायद बीजेपी से उनकी बात बन नहीं पा रही है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी से उन्होंने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की बात की थी और पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर दावा ठोका था। वही बीजेपी का कहना था कि वह अपनी पार्टी का ही बीजेपी में विलय कर ले या फिर गठबंधन करना है तो 1 या 2 सीटों से ही संतोष करे। इसके बाद जयंत चौधरी नए सिरे से संभावनाओं की तलाश में जुट गए हैं।

बेंगलुरु की विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होंगे जयंत

अब तो यह भी कहा जा रहा है कि वह 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में होने वाले विपक्षी दलों की बैठक का भी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले 23 जून को पटना की मीटिंग में वे नहीं आए थे ।माना जा रहा है कि वह एक बार फिर से अखिलेश के साथ जाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसका आज तक किसी बड़े दल के साथ गठबंधन का प्लान नहीं हुआ है।गौरतलब है कि जयंत चौधरी बिजनौर कैराना ,मुजफ्फरनगर, नगीना, अमरोहा ,मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़ ,हाथरस l,फतेहपुर सीकरी ,आगरा और मथुरा के सीटों पर दावा ठोक रहे हैं।ये सारी सीटें जाट बहुल है।

जाट बहुल क्षेत्रों पर कर रहे दावा

जयंत चौधरी सामाजिक समीकरण एवं एसपी के यहां कमजोर रहे इतिहास का हवाला देते हुए जाट बहुल क्षेत्रों पर दावा ठोक रहे हैं ।दरअसल एसपी और आरएलडी के बीच इसी साल हुए निकाय चुनाव के बाद संबंध बिगड़ गए थे।मेरठ की मेयर शीट समेत कई जगहों पर एसपी के साथ आरएलडी के मतभेद थे।इसके बाद यचर्चा यहां तक छिड़ी की जयंत चौधरी कांग्रेस संग गठबंधन कर सकते हैं,लेकिन उस पर भी मुहर नहीं लग पाई।संभावना यहां तक जताई जा रही है कि यदि एसपी से फिर झटका लगा तो फिर जयंत चौधरी बीएसपी और कांग्रेस के साथ मिलकर गठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं।

 

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