असम में बाल विवाह उल्लंघन कानून मामले में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के बाद हर तरफ हंगामा मचा है।लेकिन इस सबके बीच बाल विवाह के कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें कानून का ही सहारा लेकर कानून से बचने का प्रयास किया गया है। बाल विवाह के सामने आए ऐसे मामले में दूल्हा और दुल्हन के परिवारों के बीच समझौता वाला हलफनामा या शपथ पत्र बनाया गया है और कुछ नियमों और शर्तों के साथ सरकार द्वारा अधिकृत नोटरी एडवोकेट द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है। हालांकि वास्तव में कई मौकों पर इन नियमों और शर्तों का ठीक से पालन नहीं किया जाता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो इन हलफनामों का इस्तेमाल कानून के चंगुल से बचने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाता है।
हलफनामों में कई शर्तों का उल्लेख
नौटरी की मुहर लगी ऐसी ही एक हलफनामे की प्रति में उल्लेखित शर्तों पर गौर किया जाए तो इसमें कई बातें लिखी मिलती है। वधू पक्ष के साथ ही वर पक्ष भी अपनी बेटी और बेटा को नाबालिग बताते हैं। दोनों पक्ष मुस्लिम शरीयत के अनुसार परिपक्वता की उम्र प्राप्त करने के बीच अपने नाबालिग बेटा और बेटी के विवाह को संपन्न करने में रुचि रखते हैं,लेकिन परिपक्वता की आयु नहीं होने की वजह से वह इस समय शादी करने में असमर्थ हैं । इस परिस्थिति में वह इस शर्त के साथ फिलहाल शादी कर रहे हैं कि परिपक्वता की आयु से पहले वर पक्ष अपने बेटा को अपने घर और वधू पक्ष अपनी बेटी अपने घर पर रखेगा। इस बीच न तो वर पक्ष वाला वधू को अपने घर लाने पर दबाव नहीं बनाएंगे और न ही वधू पक्ष वाले अपनी बेटी को शशुराल जाने के लिए बाध्य करेगा।परिपक्वता की उम्र प्राप्ति के पश्चात ही यह शादी मान्य होगी और लड़का तथा लड़की वर और वधू के रूप में रह सकेंगे। जिस भी पक्ष के द्वारा इन शर्तों का उल्लंघन किया जाएगा उन्हें कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा । यह बात दिगर है की हलफनामे में उल्लेखित इन शर्तों के बावजूद इनका पालन नहीं होता है और ये कम उम्र में ही बच्चों को जन्म देते की स्थिति में आ जाते हैं।कई बार तो बालिका वधू की प्रसव के दौरान मौत भी हो जाती है।
बाल विवाह उल्लंघन कानून मामले में आरोप पत्र दाखिल करना बड़ी चुनौती
असम में अब तक बाल विवाह उल्लंघन कानून मामले में 2500 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। असम के डीजीपी पर बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब तय समय सीमा के अंदर आरोप पत्र दाखिल करने की चुनौती है।असम के डीजीपी जीपी सिंह ने बताया कि राज्य में बाल विवाह के मामलों में 2500 से अधिक गिरफ्तारियां होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा के अंदर आरोप पत्र दाखिल करने की है। इस मामले में डीजीपी जीपी सिंह ने कहा कि पुलिस की मंशा किसी को परेशान करने की नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य दो-तीन वर्षो के अंदर असम से बाल विवाह की प्रथा को पूरी तरह से खत्म करना है।
आरोप पत्र दाखिल करने की निर्धारित समय सीमा
डीजीपी जीपी सिंह ने कहा कि हमने 4074 मामले दर्ज किए हैं। मंगलवार सुबह तक 2500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इन मामलों के सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्दी ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आरोप पत्र दाखिल करने की समय सीमा 60 से 90 दिनों की होती है, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। पुलिस द्वारा इस समय सीमा के अंदर आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने की स्थिति में आरोपियों के लिए जमानत पर रिहा हो जाना आसान होता है साथ ही पुलिस का पक्ष भी कमजोर होने लगता है।

