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अटल- आडवाणी दोनो हो जायेंगे भारत रत्न से सम्मानित,सम्मान के साथ बीजेपी का लाभ

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एक जमाना था जबकि पूरे देश में अटल और आडवाणी की जोड़ी भारतीय राजनीति ठीक वैसे ही धूम मचा रही थी ,जैसा कि आज नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी राजनीति में धूम मचा रही है।कभी आडवाणी को साइड लाइन करने के आरोपी माने जाने वाले नरेंद्र मोदी ने ही आज ट्वीट कर इस बात का ऐलान किया कि भारतीय जनता पार्टी के वयोवृद्ध नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।इसके साथ ही लालकृष्ण आडवाणी अटल बिहारी वाजपेई के साथ भारतीय जनता पार्टी के दूसरे ऐसे बड़े ऐसे नेता बन गए हैं,जिन्हें भारत के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। आडवाणी को ऐसा सम्मान देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उसकी सरकार ने राम मंदिर की स्थापना और बीजेपी को खड़ा करने में उनके योगदान को सम्मान दिया है।

आडवाणी और राममंदिर एक दूसरे के पूरक

देश में लाल कृष्ण आडवाणी और राम मंदिर आंदोलन एक दूसरे के पूरक रहे हैं और भाजपा इसका एक माध्यम रही है। विश्वनाथ प्रताप सिंह के शासन के दौरान मंडल कमीशन की काट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कथित तौर पर कमंडल आंदोलन चलाया था।इस दौरान अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए राम रथ यात्रा निकाली थी।इस रथ के सारथी अभी के भारत के प्रधान,मंत्री नरेंद्र मोदी थे। हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने तत्कालीन बिहार और वर्तमान झारखंड के मसानजोर में इस रथ को रोक लिया था और लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। 1990- 1992 ईस्वी में जब हिंदू संगठनों और बीजेपी के नेतृत्व में अयोध्या में राममंदिर निर्माण के उद्देश्य से कई रैलियां का आयोजन किया जा रहा था,उसमें आडवाणी जी की भी एक बड़ी भूमिका होती थी।यहां तक की ऐसी ही एक रैली जो 6 दिसंबर 1992 ईस्वी में इतनी उग्र हो गई कि इसने बाबरी मस्जिद के गुंबद को ही गिरा दिया, उस रैली में भी लालकृष्ण आडवाणी की बड़ी भूमिका थी। यहां तक की भीड़ के उग्र हो जाने के बाद बाबरी विध्वंस को लेकर लालकृष्ण आडवाणी पर भी अदालत में मुकदमा चला था, हालांकि बाद में इन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोप से मुक्त कर दिया गया था।

वरिष्ठों का सम्मान और युवाओं का मान रखती है बीजेपी

2014 ईस्वी में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही विरोधी राजनीतिक दल के नेता लाल कृष्ण आडवाणी को लेकर नरेंद्र मोदी पर उनकी राजनीति हथियाने और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर धकेलने का आरोप लगाते रहे हैं।बीजेपी ने मोदी और शाह के भारत की राजनीति में उभार के बाद लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी सरीखे नेताओं को मार्गदर्शक मंडली में भेज दिया था। लेकिन अब लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से सम्मानित कर नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी एक तरफ युवाओं को मान देना जानती है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी वरिष्ठों का सम्मान करना भी जानती है।

कर्पूरी ठाकुर और लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न सम्मान, बीजेपी का 400 + पर ध्यान

किसी व्यक्ति को उनके देश सेवा के लिए देश के सर्वोच्च पुरस्कार ‘ भारत रत्न’ से सम्मानित करना देश के लिए एक गौरव की बात है, लेकिन एक लंबे समय से भारत का यह सर्वोच्च पुरस्कार विभिन्न सरकारों द्वारा राजनीति के चश्मे से देखा जाने लगा है। देश के सच्चे सपूत को सम्मानित करने के बहाने अपने लिए और अपनी पार्टी के लिए वोट बैंक तलाशे जाने लगे हैं। वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दो महत्वपूर्ण व्यक्तियों कर्पूरी ठाकुर और लालकृष्ण आडवाणी को दिए गए भारत के इस सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न देने के पीछे भी सूक्ष्म पड़ताल करने पर बीजेपी का वोट बैंक वाला नजरिया भी साफ नजर आता है।

कर्पूरी ठाकुर नाई समुदाय से ताल्लुक रखते थे जो अत्यंत पिछड़ी जाति केटेगरी में आता है। यह समाज समुदाय में हासिये पर रहता है,लेकिन कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न देने के बहाने नरेंद्र मोदी की सरकार ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग ईबीसी समुदाय को अपने पाले में लामबंद करने की कोशिश की है,जिसकी बिहार में आबादी 26% है।

वहीं दूसरी तरफ लाल कृष्ण आडवाणी को दिए जाने वाले भारत के इस सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न के के छिपे हुए तथ्यों का विश्लेषण करें तो यहां भी वोट बैंक के जुगाड़वाली राजनीति स्पष्ट रूप से नजर आने लगेगी।लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर निर्माण से जुड़े हुए थे, इस कारण राम भक्तों में उनका एक बड़ा क्रेज था ।पाकिस्तान जाकर जिन्ना के सम्मान में कसीदा पढ़ने से पूर्व तक देश की एक बड़ी जनसंख्या उन्हें पीएम के तौर पर देखना चाहती थी।बीजेपी पूरे देश स्तर पर उनके लालकृष्ण आडवाणी भारत रत्न से सम्मानित कर देश के बहुसंख्यक हिन्दू और उनके विभिन्न वर्गों के चहेतों पर डोरे डालकर लोकसभा चुनाव 2024 में अपने 400 प्लस के टारगेट को अंदर ही अंदर पूरा करने का विचार रखता है।

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