जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक बार फिर भड़काऊ नारेबाजी को लेकर सियासी घमासान तेज होने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित ‘उकसाने वाले’ नारे लगाए जाने का वीडियो सामने आया है। जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार किया है। जेएनयू प्रशासन ने ‘भड़काऊ’ नारे लगाने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। जेएनयू प्रशासन की ओर से दिल्ली पुलिस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कुछ छात्रों ने अत्यंत आपत्तिजनक, उकसाने और भड़काने वाले नारे लगाए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सीधे तौर पर अवमानना की।
जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से वसंत कुंज (नॉर्थ) के थाना प्रभारी को लेटर भेजा गया है। पत्र में विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ से जुड़े छात्रों ने रात करीब 10 बजे ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा’ नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था। शुरू में ऐसा प्रतीत हुआ कि यह सभा पांच जनवरी, 2020 की घटना की याद में आयोजित की गई थी और लगभग 30 से 35 छात्र उपस्थित थे।
हालांकि, पत्र में कहा गया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर न्यायिक फैसले के बाद कार्यक्रम का स्वरूप बदल गया जिसके बाद कुछ छात्रों ने कथित तौर पर ऐसे नारे लगाए जिन्हें विश्वविद्यालय ने भड़काऊ और आपत्तिजनक बताया। घटना का एक कथित वीडियो भी ऑनलाइन सामने आया है। प्रशासन ने दावा किया कि ये नारे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के समान हैं और जेएनयू की आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं।
विश्वविद्यालय ने वर्तमान जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित कई छात्रों के नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान उनकी पहचान की गई। उसने कहा कि नारे जानबूझकर, बार-बार लगाए गए। उनमें सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सौहार्द और सुरक्षा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने की क्षमता थी। पत्र में कहा गया कि सुरक्षा अधिकारी मौके पर मौजूद थे और स्थिति पर नजर रखे हुए थे।
