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झारखंड: वन विभाग ने वन भूमि का दिया क्लियरेंस

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रांची(बीरेंद्र कुमार झा): वन विभाग की जमीन को आम तौर पर सामान्य उपयोग में नहीं लाया जा सकता है,यही कारण है कि निजी और सरकारी क्षेत्र की कई योजनाओं का काम बीच में ही लटक जाता है।झारखंड में भी ऐसी कई योजनाएं अटकी पड़ी थी। ऐसे में इन योजनाओं की कार्य प्रगति के लिए वन विभाग से वन भूमि देने की मांग की गई थी। अब वन विभाग के द्वारा ऐसे वन भूमि की अनुमति दे दिए जाने से इन अटकी योजनाओं के कार्य प्रगति में तेजी आएगी।

रांची में स्थापित होगा बी एस एफ का कैंप

कांके के सुगनु में बी एस एफ के एक बटालियन का स्थापित होना प्रस्तावित है। इसके लिए बी एस एफ की तरफ से वन विभाग से 32 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की गई थी। वन विभाग ने बी एस एफ के इस मांग के आलोक में उसे 12.14 हेक्टेयर वन भूमि उपयोग करने की अनुमति दी है। वन विभाग के अनुसार शेष भूमि जंगल – झाड़ है,जिसका स्वामित्व वन विभाग के पास नहीं होकर भू राजस्व विभाग के पास है। ऐसे में बाकी जमीन की अनुमति भू राजस्व विभाग से ही प्राप्त किया जा सकता है।

अडानी और पी जी सी आई एल को भी मिली अनुमति

वन विभाग ने गोड्डा में निजी क्षेत्र की अडानी पावर लिमिटेड को 8 हेक्टेयर वन भूमि उपयोग की अनुमति दी है। विभाग द्वारा अडानी पावर को स्टेज 2 स्वीकृति के लिए लगाए गए प्रावधान के तहत वन भूमि के उपयोग की अनुमति दी है। वन विभाग ने पावर ग्रिड कॉरपोरेशन (पी जी सी एल) के लिए भी 10 हेक्टेयर बन भूमि के उपयोग की अनुमति दी है।

एन एच 33 के लिए भी मिली वन भूमि

एन एच 33 फोरलेन सड़क से सिक्स लेन वाली सड़क में बदलने के लिए जिस भूमि की जरूरत है उसमें बंजर भूमि के साथ वन भूमि भी शामिल है। वन विभाग के द्वारा वनभूमि के उपयोग की स्वीकृति दे दिए जाने के बाद एन एच 33 की सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन में बदलना आसान हो जायेगा।
पर्यावरण को सुरक्षित रखने का बड़ा योगदान है। साथ ही विकास के कार्यक्रमों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। ऐसे में वन भूमि को उपयोग के लिए या जाना अनिवार्य हो जाता है। लेकिन कठिनाई कब खड़ी होती है जब निजी और सरकारी क्षेत्र के संस्थान वन विभाग की शर्तों पर जमीन लेने के बाद उसपर लगे पेड़ कटवाकर अपना काम निकाल लेते हैं,लेकिन शर्तों के अनुसार पेड़ लगाते नहीं हैं

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