क्या यूपीएससी भी फर्जीवाड़ा का अड्डा है ? चार आईएएस के खिलाफ जांच शुरू !

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न्यूज़ डेस्क
देश को आईएएस देने वाली संस्था यूपीएससी भी अब शक के दायरे में आ गया है। जिस तरह फर्जी प्रमाणपत्र के जरिये वहां लोगों का चायन किया गया है उससे साफ़ है कि मोदी सरकार में कुछ भी संभव है। महाराष्ट्र की चर्चित ट्रेनी आइएएस पूजा खेडकर के विवाद के अब देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों (आइएएस/आइपीएस) के लिए विकलांगता सर्टिफिकेट के इस्तेमाल का पंडोरा बॉक्स  खुलने लगा है। 

गुजरात सरकार ने अपने स्तर पर राज्य के चार आइएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। गुजरात कैडर के इन सभी अधिकारियों ने विकलांगता सर्टिफिकेट के जरिए आइएएस कोटा हासिल किया है। इनमें तीन जूनियर और एक सीनियर लेवल का अधिकारी शामिल है। 

पूजा खेडकर विवाद के बाद गुजरात सरकार इस मामले में काफी सतर्कता बरत रही है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा शुरू की गई जांच में कोई भी शंका नहीं छोडऩे के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जांच के बाद इन चार अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। अब इनके विकलांगता प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।

बताया जाता है कि एक आइएएस अधिकारी का विकलांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर चयन किया गया था, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि अधिकारी को फिलहाल कोई विकलांगता नहीं है। 

हालांकि एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह भी संभव है कि संबंधित अधिकारी ने जब सेवा शुरू की थी, तब वह विकलांगता से ग्रस्त रहा होगा, जो समय के साथ ठीक हो गया होगा, लेकिन सच्चाई पूरी जांच के बाद ही पता चल सकेगी।

सरकार इन अधिकारियों के विकलांगता प्रमाण-पत्रों की जांच कर रही है। सामान्य प्रशासन विभाग की जांच में अगर इन अधिकारियों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाते हैं सरकार इसकी रिपोर्ट यूपीएससी को देगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
नखरेबाज ट्रेनी आइएएस अधिकारी पूजा खेडकर की लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी मसूरी के एक पत्र के बाद वाशिम में ट्रेनिंग रोक दी गई। वह वाशिम से अपने घर के लिए रवाना हो गईं। उन्होंने कहा, मैं जल्द ही दोबारा वाशिम आऊंगी। फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र जमा कर आइएएस बनने के आरोपों का सामना कर रही पूजा को 23 जुलाई तक एकेडमी में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मनोज सोनी इस्तीफा दे दिया है। बताया जाता है कि उन्होंने 14 दिन पहले अपना इस्तीफा कार्मिक विभाग को भेजा था लेकिन इनकी जानकारी शनिवार को सामने आई।

हालांकि उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। उनका कार्यकाल मई 2029 तक था लेकिन उन्होंने पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वे इस्तीफे के बाद सामाजिक और धार्मिक कामों पर ध्यान देंगे। सोनी ने साफ किया कि उनके इस्तीके का पूजा खेडकर विवाद से कोई लेना देना नहीं है। 

सोनी के इस्तीफे के बाद सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा है कि उन्हें यूपीएससी से जुड़े विवादों के बीच पद से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक लगातार संवैधानिक निकायों की शुचिता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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