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भारत रोकेगा अमेरिका की हेकड़ी ,K4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण एक इशारा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए जो वायदे किए थे,उसमें रूस और यूक्रेन के बीच के युद्ध समाप्त कराना शामिल था, इसके बाद उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने का सनक सवार हुआ। लेकिन इसमें जब वह असफल हो गए तो लगता है कि इससे गुस्साकर अब वे पूरे विश्व को ही युद्ध की आग में झोंकने पर उतारू हो गए हैं। भारत समेत दुनिया भर के कई देशों को पहले ट्रंप ने टैरिफ के मुद्दे पर धमकाया और अब तो उससे भी आगे बढ़ गए हैं और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उसके घर पर हमला कर जबरन हथकड़ी लगाकर अमेरिका ले आना और अब रूस के जहाज को कब्जे में ले लेना है। अभी आगे यह क्या-क्या करेंगे कहना मुश्किल है। भारत को एक और बड़े टैरिफ की शपथ लगाने की बात भी हो कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप की यह हेकड़ी अब ज्यादा दिन तक चलने वाली नहीं। भारत के प्रधानमंत्री चाहे सीधे-सीधे ट्रंप के किसी भी तंज का जवाब नहीं दे रहे हो लेकिन अंदर ही अंदर भारत ट्रंप समेत भारत पर बुरी नजर रखने वाले पर नकेल कसने की अपनी तैयारी कर रही है। अमेरिकी और चीनी जासूसी जहाज की तैनाती के बावजूद भारत ने बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर इस बात का संदेश दे दिया है।

भारत द्वारा यह टेस्ट विशाखापट्टनम तट के पास दिसंबर 20250 में किया गया। भारत जमीन, हवा के बाद अब समुद्र से भी परमाणु हथियार लॉन्च कर सकेगा।

ये मिसाइल 2 टन तक न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। K-सीरीज की मिसाइलों में “K” अक्षर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है। इनकी भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका रही है।

K-4 मिसाइल, जमीन से लॉन्च होने वाली अग्नि-सीरीज पर आधारित एक एडवांस सिस्टम मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से लॉन्च के लिए बनाया गया है। लॉन्च के समय मिसाइल पहले समुद्र की सतह से बाहर आती है, इसके बाद उड़ान भरते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसे अरिहंत-क्लास की पनडुब्बियों से दागी जा सकती है।

K-4 को भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। इससे भारत की ‘डिटेरेंस’ क्षमता मजबूत होती है, यानी संभावित दुश्मन पर यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जा सकता है।

K-4 मिसाइल, जमीन से लॉन्च होने वाली अग्नि-सीरीज पर आधारित एक एडवांस सिस्टम मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से लॉन्च के लिए बनाया गया है। लॉन्च के समय मिसाइल पहले समुद्र की सतह से बाहर आती है, इसके बाद उड़ान भरते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसे अरिहंत-क्लास की पनडुब्बियों से दागी जा सकती है।

K-4 को भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। इससे भारत की ‘डिटेरेंस’ क्षमता मजबूत होती है, यानी संभावित दुश्मन पर यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जा सकता है।

इस मिसाइल परीक्षण में अमेरिकी और चीनी जासूसी जहाज के द्वारा गड़बड़ी किए जाने की आशंका को देखते हुए इस पर लगाम लगाने के लिए भारत द्वारा बंगाल की खाड़ी में ‘नोटम’ (NOTAM – Notice to Airmen) जारी किया गया था। नोटम विमानन सुरक्षा से जुड़ा एक अस्थायी नोटिस है, जो क्षेत्र में उड़ान संचालन को प्रभावित करता है। अमेरिका और अन्य देशों पर इसका सीधा असर होगा, क्योंकि यह क्षेत्र में नौसैनिक अभ्यास और हवाई गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जिससे उनकी उड़ानों और नौसेना संचालन में समन्वय की आवश्यकता बढ़ती है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव और भारत-अमेरिका-जापान के सामरिक गठजोड़ के चलते, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों पर नज़र रखी जाती है।

नोटम (NOTAM) विमानन सुरक्षा से जुड़ा एक आधिकारिक नोटिस है, जिसे ‘नोटिस टू एयरमेन’ (Notice to Airmen) कहते हैं।
इसे विमानन प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाता है, ताकि पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को किसी हवाई क्षेत्र में अस्थाई खतरों, जैसे सैन्य अभ्यास, मिसाइल परीक्षण, या अन्य गतिविधियों के बारे में सूचित किया जा सके।

इसका बड़ा सामरिक महत्व है।बंगाल की खाड़ी भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ‘मालाबार’ जैसे युद्धाभ्यास करते हैं, और चीन भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है
अमेरिकी नौसेना (US Navy) और अन्य मित्र देशों (जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया) की नौसेनाएँ इस क्षेत्र में नियमित अभ्यास करती हैं, जिसके कारण उन्हें इस नोटम का पालन करना पड़ता है, जिससे उनके संचालन में बदलाव आता है।
यह नोटम चीन की बढ़ती गतिविधियों (जैसे म्यांमार और बांग्लादेश के साथ गठजोड़) पर नज़र रखने और अपनी सामरिक उपस्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे चीन की नौसेना के लिए भी यह क्षेत्र संवेदनशील हो जाता है।
यह खाड़ी भारत के प्रमुख बंदरगाहों (कोलकाता, चेन्नई) और तेल-गैस भंडारों के करीब है, इसलिए नोटम से इन मार्गों पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ती है, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती है।
भारत का यह कदम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बनाए रखने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे अन्य देशों को भारत की सैन्य क्षमता का अंदाज़ा होता है।
संक्षेप में, भारत का यह कदम सामरिक अभ्यास और सुरक्षा को लेकर है, जो क्षेत्रीय शक्तियों (अमेरिका, चीन, आसियान देश) के लिए महत्वपूर्ण है और उनके सैन्य व वाणिज्यिक संचालन को प्रभावित करता है।

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