रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर 500% तारीफ लगाने की बात कह कर अमेरिका ने अमेरिका और भारत के बीच निराशा का वातावरण तैयार कर दिया था। लेकिन परिस्थितियां अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। निराशा के बीच अचानक आशा की किरण फूट पड़ी है। अमेरिका भी अब यह मानकर चल रहा है कि भारत अपने किसान और लोगों के हित को देखते हुए ही अपना व्यापारिक नीति तय करेगा और उसने भी अब कड़ाई करने की जगह बैकफुट पर आकर नरमी बरतने का संकेत देना प्रारंभ कर दिया है। संकेत मिलते ही शेयर बाजार ने सोमवार को इस पर अपना रिएक्शन दिया। अब भारत की तरफ से बड़ा अपडेट सामने आया है। यह सिर्फ अमेरिका के साथ ट्रेड डील तक सीमित नहीं है। अलबत्ता, यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) तक जाता है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते की बातचीत अंतिम चरण में है। वहीं, अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने यह बात गुजरात के राजकोट में क्षेत्रीय एमएसएमई कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के तौर पर कही।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपनी व्यापार वार्ताओं में ‘अच्छी प्रगति’ की बात कही थी। इस महीने की शुरुआत में ब्रसेल्स में गोयल और यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक की मुलाकात के बाद यह प्रगति हुई थी। दोनों पक्षों ने कहा था कि अनसुलझे मुद्दे कम हो गए हैं। उन्होंने जल्द से जल्द एक निष्पक्ष और संतुलित समझौते पर पहुंचने के अपने इरादे को दोहराया था। ब्रसेल्स में हुई इस बैठक के दौरान गोयल और सेफकोविक ने अपनी बातचीत टीमों को चर्चा में तेजी लाने और लंबित मामलों को सुलझाने का निर्देश दिया था।
पिछले कुछ सालों में कई दौर की बातचीत हुई है। समझौते का टारगेट इस महीने के अंत में नई दिल्ली में होने वाली अगली भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक से पहले इसे अंतिम रूप देना है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। साल 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से ज्यादा था।
गोयल का बयान व्यापार मुद्दों पर चल रही बातचीत के बीच आया है। सोमवार को अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी बातचीत को लेकर उम्मीद जताई। भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर कई दौर की बातचीत की है। गोर ने कहा कि अगले दौर की बातचीत मंगलवार को ही होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली में पदभार ग्रहण करने के बाद गोर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को एक मजबूत साझेदारी के ढांचे के भीतर देखा जाना चाहिए। उन्होंने चल रही व्यापार वार्ताओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘असली दोस्त असहमत हो सकते हैं। लेकिन, वे मतभेदों को सुलझा लेते हैं।’ गोर ने यह भी कहा कि टैरिफ और बाजार पहुंच से संबंधित अनसुलझे मुद्दों के बावजूद भारत और अमेरिका व्यापार मामलों पर नियमित संपर्क में हैं। यह सब तब हो रहा है जब नई दिल्ली यूरोपीय संघ के साथ भी अपनी व्यापार वार्ताएं आगे बढ़ा रहा है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत के लिए एक बड़ा कदम होगा। कारण है कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वहीं, अमेरिका के साथ बातचीत भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका भी भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। इन वार्ताओं से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करते हुए निष्पक्ष और संतुलित समझौते करना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत अपने उद्योगों और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखेगा। यह दर्शाता है कि भारत किसी भी व्यापार समझौते में अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहता है।
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। लेकिन, वे मिलकर इन मतभेदों को दूर कर सकते हैं। यह बयान भारत और अमेरिका के बीच विश्वास और सहयोग को दर्शाता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दोनों महत्वपूर्ण व्यापार वार्ताएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। भारत के लिए ये समझौते न केवल आर्थिक विकास के अवसर खोलेंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को भी मजबूत करेंगे।
