अध्यादेश मामले पर आप को मिला कांग्रेस का साथ, क्या विपक्ष देगा सत्तापक्ष को मात

0
125

बीरेंद्र कुमार झा

लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकजुटता के मुद्दे पर बेंगलुरु में होने वाले विपक्षी दलों की बैठक से पहले आम आदमी पार्टी को कांग्रेस का साथ मिल गया है। कांग्रेस दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े केंद्र सरकार के अध्यादेश का संसद में समर्थन नहीं करेगी। आम आदमी पार्टी कांग्रेस से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रही थी।

आप का बेंगलुरु की बैठक में भाग लेने का रास्ता साफ

कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी राज्यपालों के जरिए गैर बीजेपी शासित राज्यों में हस्तक्षेप करने की केंद्र सरकार के किसी भी कथित प्रयास का विरोध करेगी। कांग्रेस देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने के प्रयासों का हमेशा विरोध करती रही है, और आगे भी इस पर अडिग रहेगी ।वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी ने संसद के मानसून सत्र में दिल्ली की सेवाओं से जुड़े केंद्र के अध्यादेश पर विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है।

कांग्रेस के इस ऐलान के बाद आम आदमी पार्टी का बेंगलुरु बैठक में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हो गया है।इससे पहले गत शनिवार को मानसून सत्र में रणनीति को लेकर हुई कांग्रेस की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस निर्वाचित सरकारों को संघीय ढांचे पर किसी भी तरह के हमले का विरोध करती रही है, पार्टी आगे भी संसद के अंदर और बाहर इसपर कायम रहेगी। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के फैसले का स्वागत किया है। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि कांग्रेस ने सेवाओं के नियंत्रण से संबंधित केंद्र सरकार के अध्यादेश का सदन में स्पष्ट तौर पर विरोध करने की घोषणा की है या एक सकारात्मक का घटनाक्रम है।

मानसून सत्र में बिल पेश करेगी सरकार

केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा मानसून सत्र में 21 बिल लाए जाने की संभावना है, जिसमें दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार से जुड़ा अध्यादेश भी शामिल है ।केजरीवाल इस अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटा रहे हैं। पटना में विपक्षी दलों की बैठक में भी केजरीवाल ने कहा था कि कांग्रेस ने अगर अध्यादेश के विरोध में हमारा समर्थन नहीं किया तो वह विपक्ष की बैठक में नहीं जाएंगे।

क्या है अध्यादेश में

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 11 मई को राजधानी में पुलिस, कानून व्यवस्था और भूमि को छोड़कर अन्य सभी सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंप देने का निर्देश दिया था। इसके बाद 19 मई को केंद्र सरकार ने “ग्रुप ए ‘ अधिकारियों के तबादले और उनकी तैनाती को लेकर एक प्राधिकरण गठित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश 2023जारी किया था।आम आदमी पार्टी ने उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

राज्यसभा में 117 बोर्ड की पड़ेगी जरूरत

लोकसभा में स्पष्ट बहुमत रहने के कारण बीजेपी के लिए लोकसभा में इस विधेयक को पास कराना बिल्कुल आसान है, जो कुछ भी पेंच इसमें फंस सकता है, वह राज्यसभा में इसे पास कराने के दौरान ही सामने आएगा।राज्यसभा में अभी सदस्यों की संख्या 237 है इनमें से पांच नामित सदस्य हैं यानी सामान परिस्थितियों में 232 सदस्य वोट कर पाएंगे। ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी विधेयक के विरोध में 117 वोट जुटाने में सफल रहती है तो केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है।

राज्यसभा में एनडीए की ताकत

फिलहाल राज्यसभा में बीजेपी के 93 सांसदों के साथ एनडीए के सदस्यों की संख्या 106 है ।राज्यसभा में 5 मनोनीत सदस्य हैं।ये किसी पार्टी से संबंधित नहीं है ,लेकिन सदन में जरूरत पड़ने पर ये भी वोट कर सकते हैं। पांचों नामित सदस्य यदि बीजेपी को वोट करते हैं तो राज्यसभा में एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 111 हो जाएगी।इसके बावजूद एनडीए को बहुमत जुटाने के लिए दूसरी पार्टियों से सहयोग लेना पड़ेगा।

इससे मिल सकती है एनडीए को मदद

पूर्व में भी ऐसे कई अवसर आए जब राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत नहीं रहने के बावजूद बीजेपी विधायक को पास करा लेने में सफल रही है।ऐसे में इस बार भी यह उसी तर्ज पर इस विधेयक को भी पास कराने की जुगत भिड़ाएगी।खासकर इस समय इसकी नजर बीजू जनता दल ,तेलुगू देशम पार्टी ,जेडीएस , बीएसपी और निर्दलीय समेत उन पार्टियों पर होगी,जिन्होंने इसे पहले भी समर्थन किया है या फिर वह बीजेपी गठबंधन में शामिल होने का सोच रहे हैं।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here