पसमांदा मुसलमानो को बीजेपी साध लेती है तो सपा और आरएलडी की मुश्किलें बढ़ सकती है !

0
186


अखिलेश अखिल 
प्रधानमंत्री काफी समय से यूपी के पसमांदा मुसलमानो को साधने में जुटे हैं। वह आगे कितना साध पाते हैं यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा लेकिन एक सच यह भी है कि 2019 के चुनाव में बीजेपी को जो मुस्लिम वोट मिले थे उसमे पसमांदा समाज की बड़ी भूमिका थी। 2019 में बीजेपी को मुसलमानो का वोट पहली बार सबसे ज्यादा मिला था। अब बीजेपी की चाहत है कि मुसलमानो में से  पसमांदा को अलग करके अपने साथ खड़ा किया जाए। यह खेल ठीक वैसा ही है जैसा कि बिहार में दलितों को बांटकर नीतीश कुमार ने महादलित तैयार किया और उसका लाभ उठाया। आज भी बिहार के महादलित समाज नीतीश कुमार के साथ खड़े हैं। यूपी में कुल  मुसलमानो की संख्या में पसमांदा की आबादी संबसे ज्यादा है। यही वह वर्ग है जो आज भी विकास से कोसों दूर है और गरीबी फटेहाली में जी रहा है। बीजेपी और खासकर पीएम मोदी की समाज को अपने पास लाने की हर कोशिश कर रहे हैं।      
जानकार मान रहे हैं कि अगर मुसलमानो में से पसमांदा समाज के कुछ और वर्ग को बीजेपी अपने साथ जोड़ लेती है तो सपा की राजनीति के साथ ही वेस्टर्न यूपी की राजनीति कर रही आरएलडी की राजनीति काफी प्रभावित हो सकती है। इन पार्टियों की राजनीतिक जमीं ही खिसक सकती है। सपा की राजनीति आज भी यादव और मुसलमानो पर टिकी है।              
 2024 के शुरू में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में एक जनसभा में मुस्लिमों खासकर पसमांदा (पिछड़े) मुस्लिमों को साधने के लिए दांव चला। पीएम के इस दांव से यूपी में मुस्लिमों के साथ लेकर सियासत करने वाली खासकर सपा और रालोद में बैचेनी हैं। दरअसल पीएम ने पसमांदा मुस्लिमों के साथ अगड़े मुस्लिमों की तरफ से भेदभाव करने, सियासी भागीदारी से वंचित रखने और उनके हक में अभी तक कुछ नहीं करने आदि बातें कहकर पूरी तरह साधा था। याद रहे कि, कांग्रेस से छिटकने के बाद मुस्लिमों की पहली पसंद यूपी खासकर वेस्ट यूपी में सपा, बसपा और रालोद बन गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा, रालोद और बसपा मिलकर चुनाव लड़े तो मुस्लिम एकतरफा उनके साथ गया था। अलबत्ता बसपा के कोर वोटर कहने जाने वाले दलित और सपा के यादव के साथ रालोद के जाट वोटर में बीजेपी की सेंध लगाने की बात सामने आई थी। 2024 में सपा और रालोद के साथ फिर चुनाव लड़ने की उम्मीद ज्यादा हैं। इसलिए दोनों दल फतह के लिए अपनी नई रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। दोनों दल चाहते है कि पीएम और बीजेपी की तमाम कोशिश के बाद भी मुस्लिम उनसे नहीं छिटके।
           समाजवादी पार्टी यूपी में सभी ’80सीटें हराओ, बीजेपी हटाओ’ का नारा दे चुकी हैं। अभी तक मुस्लिम-यादव के दम पर चुनाव लड़ने वाले अखिलेश ने भी पीएम की तर्ज पर बीजेपी के माने जाने वाले पिछड़ों में सेंध लगाने की रणनीति तैयार की है। अब अखिलेश पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक यानी  पीडीए की भी बात करने लगे हैं। अखिलेश यादव कह भी चुके हैं कि 2024 में एनडीए को पीडीए हराएगा। पीडीए मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक। दरअसल, यूपी में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक.की खासी ताकत है।          
जानकारी के मुताबिक, यूपी में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी करीब 41 फीसदी है। इसमें करीब 10 फीसदी यादव हैं। दलित आबादी करीब 21 फीसदी और अल्पसंख्यक आबादी भी करीब 20 फीसदी है। यूपी में कुल करीब 82 फीसदी आबादी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों की बैठती है। इनको साधने के लिए अखिलेश जिले-जिले दौरे भी कर रहे हैं। सपा नेताओं की मानें तो चुनाव से पहले वह सियासी रथयात्रा भी निकालेंगे। सपा के पूरे प्रदेश सचिव दिनेश गुर्जर का कहा है कि पीडीए के बल पर 2024 में सपा यूपी की सबसे बड़ी पार्टी होगी।
               वेस्ट यूपी में रालोद मुखिया जयंत चौधरी ‘प्लान 12’ पर काम कर रहे हैं। वह बीजेपी को घेरने की इस प्लान से कोशिश करेंगे। दरअसल, 2014 में मोदी लहर में रालोद सभी सीट हार गया था। खुद अजित सिहं और जयंत पराजित हुए थे। 2019 में भी दोनों पिता-पुत्र चुनाव नहीं जीत सके थे। चौधरी अजित सिंह की मौत के बाद रालोद के अध्यक्ष बने चौधरी जयंत सिंह को सपा से दोस्ती के बाद राज्यसभा भेजा हुआ हैं। 2024 में सपा और रालोद के साथ आजाद समाज पार्टी के भी चुनाव लड़ने की उम्मीद है। ऐसे में रालोद खेमे के मुताबिक, चौधरी जयंत ने वेस्ट यूपी की 12 लोकसभा सीटों बागपत लोकसभा, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा, हाथरस और फतेहपुर सीकरी को गठबंधन में लेने पर जोर दिया है। इनमें से एक नगीना सीट आजाद समाज पार्टी के लिए जयंत छोड़ सकते हैं। वहां से आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के चुनाव लड़ने की संभावना है। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here