बीरेंद्र कुमार झा
झारखंड मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष शिबू सोरेन से जुड़े लोकपाल मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद के अदालत में हुई।आंशिक सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तिथि तय की है। अदालत ने पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को बरकरार रखा।
प्रार्थी की ओर से कपिल सिब्बल ने की बहस
इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे द्वारा शिबू सोरेन के खिलाफ लोकपाल से की गई भ्रष्टाचार संबंधित शिकायत दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित है।लोकपाल इस शिकायत संज्ञान नहीं पर नहीं ले सकते थे, क्योंकियह कानूनी आवासुकताओ के अनुरूप नहीं था।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि जो आरोप लगाया गया है वह शिकायत की तारीख से 7 साल पहले का है। अतः इसपर विचार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 2013 बाद कोई प्रविष्टि नहीं है। कानून में समय सीमा तय है।किसी भी संपत्ति की कभी भी जांच नहीं की जा सकती है।सिब्बल ने कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून 2013 की धारा 53 के प्रावधान के तहत शिकायत में अपराध होने की, जो तारीख दी गई है, उसके 7 साल बाद शिकायत नहीं की जा सकती है।
लोकपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी हुए पेश
वहीं लोकपाल की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी ने प्रार्थी की दलील का विरोध किया।तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि लोकपाल के समक्ष मामला भ्रष्टाचार के लिए दिशसिद्द के स्तर पर नहीं है और प्राधिकरण ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं,ताकि वह तय कर सके की शिकायत पर आगे सुनवाई हो या नहीं श्री नाडकर्णी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे ने सरकारी कोष का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित करने जा लगाया है आरोप
शिकायतकर्ता ने इससे पहले एक आवेदन देकर शिबू शरण के खिलाफ लोकपाल की कार्रवाई पर स्थगण की के हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश को हटाने का अनुरोध किया था ।उल्लेखनीय है कि प्रार्थी शिबू सोरेन ने याचिका दायर कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में लोकपाल में दर्ज शिकायत के आधार पर सीबीआई की जांच को चुनौती दी है। उन्होंने पीई जांच पर रोक की मांग की है। पूर्व में अदालत ने प्रार्थी को अंतरिम राहत दी थी। लोकपाल को अगस्त 2020 में दी गई अपनी शिकायत में निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी कोष का दुरुपयोग कर धन संपत्ति अर्जित की है तथा वे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
