Homeदेशतुरंत करा लें यह टेस्ट, वरना ताउम्र के लिए अंधा बना देगा...

तुरंत करा लें यह टेस्ट, वरना ताउम्र के लिए अंधा बना देगा काला मोतिया

Published on

 

काला मोतिया यानी ग्लूकोमा से एक बार जो नजर चली जाए, वह वापस नहीं आती। इस बीमारी का इलाज अंधेपन को ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि आगे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किया जाता है।इसलिए सबसे जरूरी है कि बीमारी का पता समय रहते चल जाए।

डॉक्टर के मुताबिक, ग्लूकोमा की जांच में इंट्राओक्यूलर प्रेशर यानी आंखों के अंदर का दबाव बेहद अहम होता है। यही वजह है कि हर विजिट पर इस प्रेशर को मापा जाता है, ताकि बीमारी की स्थिति और इलाज का असर समझा जा सके।

नॉर्मल इंट्राओक्यूलर प्रेशर 11 से 21 mmHg के बीच माना जाता है। हालांकि जरूरी नहीं कि ज्यादा प्रेशर पर ही ग्लूकोमा हो और कम प्रेशर पर न हो। कई बार कम दबाव में भी ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है।

इसीलिए डॉक्टर ऑप्टिक नर्व में हुए स्ट्रक्चरल बदलाव, विजुअल फील्ड में आए फंक्शनल बदलाव और गोनियोस्कोपी टेस्ट को भी उतना ही जरूरी मानते हैं। गोनियोस्कोपी से यह पता चलता है कि मरीज को किस तरह का ग्लूकोमा है।
ग्लूकोमा का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है, इसलिए सही डायग्नोसिस बेहद जरूरी है। इंट्राओक्यूलर प्रेशर, ऑप्टिक नर्व, विजुअल फील्ड और गोनियोस्कोपी ये चारों पैरामीटर मिलकर बीमारी की सही तस्वीर सामने लाते हैं।
डॉ का कहना है कि भारत में आंखों की रूटीन जांच को लोग गंभीरता से नहीं लेते। 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार आई प्रेशर जरूर चेक करवाना चाहिए, खासकर डायबिटीज, फैमिली हिस्ट्री या लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वालों को।

समय पर जांच और नियमित फॉलो-अप ही काला मोतिया से होने वाले स्थायी अंधेपन से बचाव का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।

Latest articles

I-PAC पर ईडी की कार्यवाही के बाद गरमाई राजनीति,सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी

I-PAC पर ईडी के छापे के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल...

‘मोदी ने फोन नहीं किया’ वाले दावे पर भारत की दो टूक, कहा– लटनिक का दावा सही नहीं

भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर उठे विवाद पर विदेश...

USB का मलतब क्या है? जानिए Type-A से लेकर C तक हर पोर्ट का शेप, काम और स्पीड

आज के समय में हम में से ज्यादातर लोग दिन में कम से कम...

टाइफाइड को लेकर मन में अक्सर रहते हैं ये भ्रम, इनकी वजह से भी बढ़ता है खतरा

टाइफाइड आज भी कई इलाकों में एक गंभीर बीमारी बना हुआ है, जिसकी सबसे...

More like this

I-PAC पर ईडी की कार्यवाही के बाद गरमाई राजनीति,सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी

I-PAC पर ईडी के छापे के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल...

‘मोदी ने फोन नहीं किया’ वाले दावे पर भारत की दो टूक, कहा– लटनिक का दावा सही नहीं

भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर उठे विवाद पर विदेश...

USB का मलतब क्या है? जानिए Type-A से लेकर C तक हर पोर्ट का शेप, काम और स्पीड

आज के समय में हम में से ज्यादातर लोग दिन में कम से कम...