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Gautam Adani: दुनिया के टॉप टेन अरबपतियों की सूची से बाहर हुए गौतम अडानी, एक महीने में गंवा दिए 36.1 अरब डॉलर

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न्यूज़ डेस्क
गौतम अडानी (Gautam Adani)का लुढ़कना लागातर जारी है। उनकी संपत्ति में लगातार तेजी से गिरावट आ रही है। अब अडानी दुनिया के दस अरबपतियों की सूची से बहार हो गए हैं। ब्लूमबर्ग की लिस्ट के अनुसार गौतम अडानी अब दुनिया के 11वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

पिछले कुछ दिनों के भीतर गौतम अडानी समूह को भारी उठाना पड़ रहा है। सोमवार को गौतम अडानी को 8.21 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जिससे वो 11वें स्थान पर आ गए। मैक्सिकन अरबपति कार्लोस स्लिम (Carlos Slim) ने शीर्ष दस की सूची में गौतम अडानी का स्थान लिया है। बिजनेस मैग्नेट के नाम से मशहूर कार्लोस स्लिम की संपत्ति 85.7 बिलियन डॉलर है, जो गौतम अडानी की कुल संपत्ति से 1.3 बिलियन डॉलर अधिक है।

अमेरिका स्थित फोरेंसिक रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने पिछले बुधवार को अडानी समूह पर स्टॉक हेरफेर और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इसके बाद से अडानी के शेयरों में गिरावट शुरू हुई। अडानी समूह की सात सूचीबद्ध कंपनियों में से चार में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई, जिसमें अडानी टोटल गैस, अडानी पावर और अडानी विल्मर और अडानी ग्रीन एनर्जी के लोअर सर्किट लगे।

रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी की कुल संपत्ति में लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार गौतम अडानी की कुल संपत्ति बुधवार को 6 बिलियन डॉलर और शुक्रवार को 20.8 बिलियन डॉलर घटी और अब यह 84.4 बिलियन डॉलर हो गई है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आने से पहले गौतम अडानी की संपत्ति 121 बिलियन डॉलर थी।

बता दें कि हिंडनबर्ग रिसर्च की साख पर सवाल उठाते हुए अडानी ग्रुप ने कहा, “विडंबना यह है हिंडनबर्ग या उसके कर्मचारियों या उसके निवेशकों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है। इसकी वेबसाइट का कहना है कि संगठन के पास ऐसा अनुभव है जो दशकों तक फैला है और फिर भी ऐसा लगता है कि इसे केवल 2017 में स्थापित किया गया है।”

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर अडानी समूह ने कहा था, “यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि एक सोची समझी साजिश है। यह भारत, भारतीय संस्थानों की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता और भारत की विकास की कहानी और महत्वाकांक्षा पर हमला है।”

अब क्या होगा कोई नहीं जानता। उधर विपक्षी दलों ने अब अडानी समूह की जांच को लेकर सरकार पर दबाब भी बढ़ा दिया है। सेबी के साथ ही आरबीआई से भी जांच कराने की मांग की जा रही है। कुछ दलों ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जांच की मांग की है। सरकार आगे कुछ करती है इसे देखना होगा लेकिन अगर सरकार कोई जांच नहीं करती है तो उसके राजनीतिक दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। बीजेपी को डर है कि अगर जांच नहीं होती है तो आने वाले चुनाव में यह मुद्दा बन सकता है। और ऐसा हुआ तो बीजेपी की परेशानी बढ़ेगी।

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