- बीरेंद्र कुमार झा
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इन दिनों गरीब संपर्क यात्रा (Garib Sampark Yatra) पर हैं और वे इस दौरान इशारों-इशारों में नीतीश कुमार एवं तेजस्वी यादव पर हमला भी बोल रहे हैं। जहानाबाद में उन्होंने नीतीश सरकार (Nitish Government) की कार्यशैली पर सवाल उठाए और फिर अरवल में उन्होंने तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने जैसा बड़ा बयान दे दिया ।पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के इस बयान से महागठबंधन में दरार भी पड़ सकती है।
जीतनराम मांझी का बेटे को सीएम पद के लिए प्रपोज करने का तर्क
गरीब संपर्क यात्रा के तहत जीतन राम मांझी अरवल पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अपने बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन को सीएम बनाने की मांग कर दी।इसके लिए उन्होंने कई कारण भी बताए। जीतन राम मांझी ने कहा कि संतोष पढ़ा-लिखा है इसलिए उसे मुख्यमंत्री बनाना चाहिए उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री के लिए अभी जिन लोगों का नाम आ रहा है, उनका बेटा संतोष वैसे लोगों को पढ़ा सकता है।वह नेट क्वालीफाइड है, प्रोफेसर है, सब कुछ है।कमी सिर्फ यही है कि वह भुइयां जाति से आता है,जो दलित हैं, गरीब है। क्या गरीब तबके के जिसकी आबादी 90 प्रतिशत है उसका नेतृत्व बिहार में नहीं होगा?
बेटे संतोष सुमन ने कहा
पिता जीतन राम मांझी की ओर से दिए गए बयान पर उनके बेटे और मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।मैं मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं हूं। जनता का प्यार-सम्मान पाने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ काम करूंगा। गरीब संपर्क यात्रा के दौरान अरवल पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जिले की अलग-अलग जगहों पर महादलित टोला की बस्तियों में नुक्कड़ सभा के माध्यम से लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लोगों से अपने बेटे संतोष सुमन को मुख्यमंत्री बनाने की अपील की।
सरकार पर उठाए सवाल
अरवल प्रखंड परिसर में भीमराव आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि इस सरकार में दलितों, गरीबों की उपेक्षा हुई है। इस सरकार में गरीबों का जितना विकास होना चाहिए उतना विकास नहीं हुआ है।
सुलगा सरकार और शिक्षा के सवाल
हमारे संविधान में मुख्यमंत्री पद के लिए जिन अनिवार्य अर्हताओं को रखा है, उसमें शिक्षा नहीं है, लेकिन आए दिन जब सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं ,तब यह सवाल भी पूरे जोर से सुलगने लगता है, कि आखिर जब विभिन्न नौकरियों के लिए एक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता होती है तो फिर हमारे माननीय विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य क्यों नहीं ? संविधान सभा में ऐसे विभिन्न सुलगते सवाल उठे थे, जिसे तात्कालिक कारणों से दबा दिया गया था। लेकिन अब जब वक्त बदला है तो ऐसे सवाल उठने लाजमी हैं। भले ही इस सवाल की सुलगाकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी अपने ही महागठबंधन के सहयोगी दल के नेताओं को घायल कर खुद के बेटा को मुख्यमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं। लेकिन जब ऐसे सवाल उठे हैं तो इसके जवाब भी ढूंढे जाने चाहिए कि क्या अब भी विधायकों मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों या दूसरे अन्य संवैधानिक पदों के लिए शिक्षा की एक न्यूनतम अर्हता होनी चाहिए या नहीं?

