महाराष्ट्र में सूखे ने 13 जिलों के किसानों को कर दिया बर्बाद, सुप्रिया सुले ने लोकसभा में सूखे के मुद्दे पर की बहस कराने की मांग

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विकास कुमार
महाराष्ट्र के 13 जिलों में सूखाड़ का संकट पैदा हो गया है,13 जिलों में मानसून के सीजन में औसत से कम बारिश हुई है। हालात ये है कि कई गांव में पेयजल का संकट पैदा हो गया है और अब टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। महाराष्ट्र के कई इलाके मानसून के दौरान बारिश को तरसते रहे। कई जगहों पर बारिश अपेक्षा के मुताबिक नहीं हुई है जिससे सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के 13 जिलों पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है और कुछ जिलों के सीधे तौर पर रेड जोन में आने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। खास कर मराठवाड़ा क्षेत्र के कुछ जिलों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं।

महाराष्ट्र के 36 में से 13 जिलों में पेयजल और पशु चारे का संकट पैदा हो गया है, मानसून की बारिश हर जगह अच्छी नहीं हुई है। अहमदनगर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, सतारा और परभणी में सूखे का संकट पैदा हो गया है। वहीं हिंगोली, वाशिम, अकोला, और अमरावती जिले के लोग भी सूखे का सामना कर रहे हैं। इसलिए इन्हें रेड जोन में रखा गया है। इस साल राज्य के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश हुई है, जिनमें 36 में से 13 जिले भी शामिल हैं। इन 13 जिलों में मराठवाड़ा के छह जिले शामिल हैं। छत्रपति संभाजीनगर और जालना इन दो जिलों में स्थिति गंभीर हो गई है,इन दोनों जिलों के कई गांवों में तो टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। वहीं एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने लोकसभा में महाराष्ट्र के सूखे के मुद्दे पर बहस कराने की मांग की है।

महाराष्ट्र में सूखे की मार से दो हजार से ज्यादा गांव पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं। सूखे की वजह से हजारों एकड़ में खड़ी खरीफ फसलों का नुकसान हुआ है। ऐसे में महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार को किसानों को राहत देने के लिए स्पेशल पैकेज का ऐलान करना चाहिए। साथ ही फसल बीमा योजना से जुड़े किसानों को भी मुआवजे का जल्द से जल्द भुगतान करना चाहिए।

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