अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि नेचुरल सप्लीमेंट सुरक्षित होते हैं,लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है।हाल ही में अमेरिका की फेमस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी बताती है कि हर्बल और डाइटरी सप्लीमेंट्स को खाद्य उत्पादों की कैटेगरी में रखा जाता है, यानी इन्हें आहार की कमी पूरी करने के लिए लिया जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि ये हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों। खासकर अगर किडनी या लिवर पहले से कमजोर हों, तो कुछ सप्लीमेंट इन अंगों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि अगर आपको किडनी या लिवर की दिक्कत है, तो आपको किन प्रोडक्ट से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
ग्रीन टी का एक कप ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन Clinical Liver Disease जर्नल के मुताबिक ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट की गोलियों में कैटेचिन्स, खासकर एपिगैलोकैटेचिन गैलेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।अधिक मात्रा में लेने पर ये लिवर में सूजन और गंभीर चोट तक का कारण बन सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से लिवर की समस्या हो।
हाई-डोज प्रोटीन पाउडर भी खतरा पैदा कर सकते हैं।बॉडीबिल्डिंग या वजन बढ़ाने के लिए लिए जाने वाले प्रोटीन सप्लीमेंट अगर जरूरत से ज्यादा मात्रा में लिए जाएं तो किडनी पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।अतिरिक्त प्रोटीन के कारण नाइट्रोजन युक्त गंदे पदार्थ को बाहर निकालने में किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
फैट-सोल्यूबल विटामिन जैसे A, D, E और K शरीर में जमा हो जाते हैं।पानी में घुलनशील विटामिन की तरह ये आसानी से बाहर नहीं निकलते। ज्यादा मात्रा में विटामिन A लिवर पर दबाव डाल सकता है और गंभीर क्षति का कारण बन सकता है।विटामिन D और E भी बिना डॉक्टर की सलाह के लेने पर, खासकर किडनी या लिवर की समस्या वाले लोगों में, नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आयरन सप्लीमेंट भी बिना जांच के लेना खतरनाक हो सकता है।आयरन जरूरी है, लेकिन शरीर में इसकी अधिकता लिवर में जमा होकर हेमोक्रोमैटोसिस नामक स्थिति पैदा कर सकती है। Journal Statpearls के अनुसार, यह रोग शरीर के टिश्यू में आयरन के अत्यधिक जमाव से जुड़ा है, जिससे कई अंगों की काम करने के तरीके प्रभावित होती है।
कुछ हर्बल उपाय भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।कॉम्फ्री में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो लिवर को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं। ब्लैक कोहोश, जिसे मेनोपॉज के लक्षणों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लिवर टॉक्सिसिटी से जुड़ा पाया गया है।गार्सिनिया कंबोजिया, जो वजन घटाने वाले उत्पादों में आम है, लिवर इंजरी से संबंधित रही है।कई पारंपरिक जड़ी-बूटियों में सक्रिय तत्वों की मात्रा और शुद्धता पर सख्त कंट्रोल नहीं होता है।
मुलेठी की जड़ भी सावधानी मांगती है। इसमें ग्लाइसिराइजिन होता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और पोटैशियम कम कर सकता है। यह किडनी या हार्ट रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए ऐसे सप्लीमेंट, जिनमें ये मिनरल अधिक हों, सख्त निगरानी में ही लेने चाहिए।
इसी तरह डिटॉक्स या फैट-बर्निंग गोलियां भी जोखिम भरी हो सकती हैं। इनमें स्टिमुलेंट, डाययूरेटिक या अज्ञात तत्वों का मिश्रण हो सकता है, जो लिवर मेटाबॉलिज्म और किडनी फिल्ट्रेशन को प्रभावित करते हैं।खासकर लिवर को इन केमिकल को तोड़ने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ सकती है।
