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क्या विटामिन बी12 की कमी से चली जाती है याददाश्त,जानें इससे क्या होती हैं दिक्कतें?

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भूलने की समस्या और सोचने की गति धीमी पड़ना अक्सर उम्र, तनाव या काम के दबाव का असर माना जाता है, लेकिन कई बार इसकी असली वजह विटामिन B12 की कमी होती है।दिमाग और नसों की सेहत के लिए जरूरी यह पोषक तत्व खासकर बुजुर्गों, शाकाहारी लोगों और कुछ मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे मरीजों में कम पाया जाता है।अगर इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो याददाश्त कमजोर होने और सोचने की क्षमता घटने जैसी बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

साइंटफिक स्टडी में लगातार सामने आया है कि उम्र या तनाव के साथ-साथ पोषण की कमी भी दिमाग के कामकाज पर असर डालती है। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान विटामिन B12 की कमी पर दिया जा रहा है। यह पानी में घुलने वाला विटामिन है, जिसे ज्यादातर हम मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों से प्राप्त करते हैं।यह दिमाग की सेल्स को सुरक्षित रखने, नर्व सिग्नल सही तरह से पहुंचाने और शरीर में होमोसिस्टीन के स्तर को कंट्रोल करने में मदद करता है।जब शरीर में B12 की कमी होती है, तो ये सभी प्रक्रियाएं गड़बड़ा जाती हैं और नतीजतन याददाश्त कमजोर होना, सोचने में समय लगना और ध्यान कम होना जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

विटामिन B12 दिमाग और नर्वस सिस्टम को कई तरीकों से सपोर्ट करता है।इसका एक सक्रिय रूप मिथाइलकोबालामिन शरीर में होमोसिस्टीन को मेथिओनिन में बदलने में मदद करता है।यह प्रक्रिया DNA बनाने और न्यूरोट्रांसमीटर तैयार करने में जरूरी है।जब B12 कम होता है, तो होमोसिस्टीन बढ़ने लगता है, जिससे दिमाग की सेल्स और नुकसान झेलती हैं। इससे याददाश्त, सीखने की क्षमता और ध्यान पर असर पड़ता है। कई रिसर्च बताते हैं कि बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में बदलाव ला सकता है, जो दिमाग के वे हिस्से हैं जो याद रखने और सोचने का काम संभालते हैं।

विटामिन B12 का दूसरा रूप एडेनोसिलकोबालामिन ऊर्जा निर्माण और माइलिन शीथ, जो नसों को सुरक्षित रखने वाली परत है,उसको मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से नसों में सिग्नल धीमे हो जाते हैं, जिससे भूलने की आदत, ध्यान में कमी और सोचने की क्षमता में गिरावट दिखाई देती है। कई मामलों में लंबे समय तक कमी बनी रहने पर डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ सकता है।

बुजुर्गों में अक्सर पेट के एसिड की मात्रा कम हो जाती है, जिससे भोजन से B12 ठीक से एवजोर्व नहीं हो पाता है।शाकाहारी और वीगन लोग भी जोखिम में होते हैं क्योंकि पौधों में प्राकृतिक रूप से B12 मौजूद नहीं होता।
पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं, जैसे सेलिएक, क्रोहन रोग, पर्निशियस एनीमिया या आंतों की सर्जरी भी अब्जोर्वेशन को प्रभावित करती हैं।
लंबे समय तक मेटफॉर्मिन या एसिडिटी की दवाएं लेने पर भी B12 का स्तर घट सकता है।
डायबिटीज, किडनी संबंधी समस्याएं और प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारण भी इस जोखिम बढ़ाते हैं।यानी B12 की कमी अक्सर एक ही वजह से नहीं, बल्कि कई वजहों के मिलकर होने से सामने आती है।

शुरुआत में बहुत हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे चीजें भूलना, ध्यान न लगना, सोचने की गति धीमी पड़ना या समस्या हल करने में दिक्कत. इसके साथ ही चिड़चिड़ापन, उदासी या चिंता जैसे मूड में बदलाव भी हो सकते हैं।

B12 से भरपूर आहार लें. मांस, मछली, अंडे और डेयरी में यह खूब मिलता है।शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट लें।

जरूरत पड़े तो सप्लीमेंट लें, गोली, ड्रॉप या इंजेक्शन किसी भी रूप में लिया जा सकता है।

रिस्क ग्रुप की जांच जरूरी, बुजुर्ग, पाचन रोग वाले मरीज और लंबे समय से दवाएं ले रहे लोग समय-समय पर जांच कराएं।

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