बिहार में कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस-आरजेडी में जंग

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  • बीरेंद्र कुमार झा

बिहार में कैबिनेट का विस्तार होना है क्योंकि कई मंत्री पद अभी खाली हैं। बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव (Bihar Deputy CM Tejashwi Yadav) ने दिल्ली में मीडिया को बयान दिया था कि जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस अपना-अपना तय कर ले और फिर इस पर बातचीत हो जाएगी। तेजस्वी यादव ने यह बयान तो दे दिया लेकिन कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस और आरजेडी में जंग छिड़ गई है। बिहार कांग्रेस तेजस्वी यादव को मानने के लिए तैयार नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस पार्टी का पक्ष

कैमूर में कांग्रेस का एक कार्यक्रम था।इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अखिलेश प्रसाद सिंह का कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने मंत्रिमंडल के विस्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर यह होगा कि जिसका जो हक है पार्टी के अनुसार नीतीश कुमार उसे दे देंगे । उन्होंने नीतीश कुमार के समक्ष अपनी बात रख दी है आगे नीतीश कुमार जो चाहे करें।

नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तेजस्वी को किया अधिकृत

दरअसल बिहार में जिस महागठबंधन की सरकार है उसमें जेडीयू, आरजेडी,कांग्रेस और अन्य छोटी पार्टियां शामिल है।इसमें जेडीयू , आरजेडी और कांग्रेस संख्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। चूंकि बीजेपी के एनडीए गठबंधन से निकलकर आरजेडी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन वाली सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनने में तो सफल रहे, लेकिन आरजेडी खेमे से लगातार उन पर मुख्यमंत्री का पद त्याग कर उस पद पर तेजस्वी यादव को बिठाने का दबाव पड़ता रहा है। शायद यही वजह थी कि जब पत्रकारों ने नीतीश कुमार से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा की थी ,तो उन्होंने कहा था कि मैं अभी समाधान यात्रा पर हूं, मुझसे यह सब मत पूछिए। यह सब बात तेजस्वी यादव से पूछिए।

तेजस्वी और अखिलेश में नही है मतैक्य

भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़कर आरजेडी,कांग्रेस और अन्य छोटी पार्टियों की महागठबंधन में शामिल होकर जब नीतीश कुमार के मुख्यमंत्रित्व में सरकार बनी तब सभी पार्टियों द्वारा कुछ चीजें गुप्त रखते हुए भी सहमति पूर्वक एक मंत्रिमंडल बना था बाद में कुछ मंत्रियों की वजह से नीतीश कुमार और महागठबंधन कि सरकार की छवि खराब होने की डर से जिन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया वे आरजेडी खेमे से हैं। ऐसे में अब होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में आरजेडी का नैतिक हक का बनता है। लेकिन कॉन्ग्रेस मंत्रिमंडल में पार्टियों के बीच एक संतुलन बनाने के दृष्टिकोण से इन सीटों पर अपना दावा कर रही है। इस मामले में तेजस्वी कॉन्ग्रेस को धत्ता बता सकते हैं, लिहाजा अपना दबाव बढ़ने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी तेजस्वी को तरजीह देने की जगह मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नीतीश कुमार को तरजीह दे रही है।

मंत्रिमंडल में सीटों की बढ़ोत्तरी के बाद 2024 के चुनाव में गटबंधन के तहत ज्यादा सीटों की चाहत

अखिलेश सिंह ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं। उनके घर में कोई विरासत की राजनीति नहीं है। तमाम कार्यकर्ताओं के सहयोग से विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में वह काम कर रहे हैं।कार्यकर्ताओं की कठिनाइयों के बारे में पता है और जो ढंग से काम करेगा आने वाले समय में वह उसे टिकट भी देंगे। उन्होंने कहा कि जैसे ही वह अध्यक्ष बने उसी समय तुरंत 594 नए प्रखंड अध्यक्ष भी बनाए गए। जिलाध्यक्षों की भी घोषणा जल्द होगी। इस सबके यारा वे अपनी पार्टी की स्थिति को बिहार में मजबूत करना चाहते हैं ,ताकि आगामी 2024 के चुनाव में महागठबंधन के तहत ज्यादा से ज्यादा सीटें प्राप्त की जा सके।

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