Homeदेशदिल्ली हाईकोर्ट से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका

दिल्ली हाईकोर्ट से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका

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दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान कथित रूप से हुए शराब नीति घोटाले के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को बड़ी राहत दी है।अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में की गई टिप्पणियों पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कई आरोपियों को राहत दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता की बेंच ने यह आदेश देते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पीएमएलए (PMLA) मामले की कार्यवाही फिलहाल आगे न बढ़ाई जाए।अदालत ने कहा कि जब तक इस मामले में सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही स्थगित रहेगी।

अदालत ने मामले में ट्रायल कोर्ट से राहत पाने वाले सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

दरअसल यह मामला पूर्व दिल्ली सरकार की आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले से संबंधित है।सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल , पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों को राहत मिली थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई।
तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यह मामला देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताया।उन्होंने कहा कि दिल्ली की पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार की आबकारी नीति में जानबूझकर बदलाव किए गए ताकि कुछ खास कारोबारियों को फायदा पहुंचाया जा सके।

उन्होंने अदालत को बताया कि जांच में हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन के संकेत मिले हैं और यह पूरा मामला एक बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आदेश ऐसा है मानो आरोपियों को बिना ट्रायल के ही बरी कर दिया गया हो।

उनके मुताबिक जांच में रिश्वत के लेन-देन से जुड़े स्पष्ट संकेत, वैज्ञानिक साक्ष्य और कई गवाहों के बयान सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामलों में जल्दी न्याय देना महत्वपूर्ण है, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला न्याय की गलत दिशा में भी ले जा सकता है।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से हवाला से जुड़े नोट्स मिले हैं।उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान सबूत मिटाने की कोशिशें सामने आईं और सौ से अधिक मोबाइल फोन नष्ट किए गए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान सीबीआई से पूछा कि मामले में स्वतंत्र गवाह कौन हैं। इस पर मेहता ने कहा कि PW-20 (प्रॉसिक्यूशन विटनेस-20) एक महत्वपूर्ण गवाह हैं और होटल रिकॉर्ड भी जांच में अहम साक्ष्य के रूप में सामने आए हैं।

तुषार मेहता ने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर जांच एजेंसियों पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया जाता है, लेकिन इस मामले में धारा 164 के तहत कई गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं। इन बयानों में कथित साजिश, पैसों के लेन-देन और रिश्वत से जुड़े विवरण सामने आए हैं.्।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियां पहली नजर में तथ्यात्मक रूप से गलत प्रतीत होती हैं। अदालत ने संकेत दिया कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच और कानूनी पहलुओं की समीक्षा आवश्यक है।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कार्यवाही पर अस्थायी रोक लग गई है और अब सभी पक्षों की नजरें 16 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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