नई दिल्ली: भारत ने आज अंतरिक्ष में नए युग की शुरुआत कर ली है। देश का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-S को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया। इस रॉकेट (विक्रम-एस) को हैदराबाद में स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने बनाया है। विक्रम-एस की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुई। इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया। ये देश की स्पेस इंडस्ट्री में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री को नई ऊंचाइयां देगा।
India’s first ever private rocket Vikram-S, named after Vikram Sarabhai, launched from Sriharikota in Andhra Pradesh. The rocket has been built by “Skyroot Aerospace”. pic.twitter.com/DJ9oN0LPfH
— ANI (@ANI) November 18, 2022
मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया
अभी तक सरकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का ही इस पर आधिपत्य था। नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा बनाए गए विक्रम-एस का पहला मिशन सफल रहा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि देते हुए इस रॉकेट का नाम ‘विक्रम-एस’ रखा गया है।
स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी
स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन गयी है जिसने 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष उद्योग को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने के बाद भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में कदम रखा है।

क्या है देश का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1?
विक्रम-1 रॉकेट 225 किलो वजन के पेलोड को 500 किमी ऊंचाई वाले SSPO या 315 किलो वजन के पेलोड को 500 किमी की लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित कर सकता है। यह रॉकेट 24 घंटे में ही बन जाता है। विक्रम-2 रॉकेट 410 किलो वजन के पेलोड को 500 किमी के SSPO और 520 किलोके पेलोड को 500 किमी के लोअर अर्थ ऑर्बिट में करेगा। इसके ऊपरी हिस्से में क्रायोजेनिक इंजन लगेगा। विक्रम-3 रॉकेट 580 किलो के पेलोड को 500 किमी के SSPO और 730 किलो के पेलोड को 500 किमी के लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करेगा। दोनों रॉकेटों को 72 घंटे में बनाकर लॉन्च किया जा सकेगा।
विक्रम-S रॉकेट में थ्रीडी-प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन लगे हैं। जिनका परीक्षण पिछले साल 25 नवंबर को नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्री लिमिटेड की टेस्ट फैसिलिटी में किया गया था। इस रॉकेट से छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस रॉकेट का वजन 545 किलोग्राम है, व्यास 0.375 मीटर है। यह उड़ान भरकर 83 से 100 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।

